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पलामू: नाला का नाम बदलकर बिना उपयोगिता के किया जा रहा पुलिया का निर्माण, ग्रामीण कर रहे विरोध

Palamu : क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और ज्यादा से ज्यादा उपयोगी मानकर किसी योजना की स्वीकृति और निर्माण कार्य पूरा किया जाता है. लेकिन पलामू जिले के पाटन में इससे अलग हो रहा है. यहां उपयोगिता, सर्वे कार्य को दरकिनार कर और नाला का नाम बदलकर पुलिया का निर्माण किया जा रहा है. ग्रामीण शिलान्यास के दिन से निर्माण कार्य का विरोध कर रहे हैं.  लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी उनकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है.

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कहां बन रही पुलिया

पाटन प्रखंड के कररकला और कालापहाड़ के बीच बंका नदी तक पुलिया का निर्माण किया जा रहा है. यहां पुलिया निर्माण की उपयोगिता नहीं के बराबर दिखती है. जिस जगह पर पुलिया बन रही है, उसके दोनों ओर निजी जमीन है और सड़क है ही नहीं. अगर यहां पुलिया बनकर तैयार हो गयी तो इसकी उपयोगिता आधा दर्जन घरों तक ही सीमित रह जायेगी.

कहां बनाने के पक्ष में हैं ग्रामीण

संजय मांझी, मनोज सिंह, धर्मदेव यादव, अनिल सिंह, जीतेन्द्र सिंह, संतोष पासवान, बचन साव, संटू मेहता, रविन्द्र सिंह, पुटन महतो, अरूण कुमार सिंह, धर्मेंन्द्र कुमार सिंह सहित तीन दर्जन ग्रामीणों ने कहा कि, सूठा पंचायत के कररकला के सतबहिनी नाला पर पुल निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है. बल्कि इससे एक किलोमीटर दूर इसी पंचायत के कलापहाड़ में उपरोक्त नाला का नाम देकर निर्माण कार्य किया जा रहा है.

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16 जनवरी को छतरपुर विधायक ने किया था शिलान्यास

ग्रामीणों ने कहा कि 16 जनवरी 2020 को छतरपुर विधायक पुष्पा देवी ने बंका नाला के छठ घाट के पास कथित सतबहिनी नाला पर पुलिया निर्माण का शिलान्यास किया था. जबकि उस नाला का नाम बंका है. सर्वे नक्शा में बंका नाला (नदी) दर्ज है. यह हल्का नं. 07 में आता है. सतबहिनी नाला कररकला के सर्वे नक्शा में दर्ज है, जो हल्का नं. 08 में आता है.

बीडीओ सही जगह किए थे स्थल निरीक्षण

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सतबहिनी नाला पर पुलिया निर्माण के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा स्वयं स्थल का निरीक्षण किया गया था. उस दौरान बीडीओ को पूरी जानकारी दी गयी थी. बताया गया था कि सतबहिनी नाला कररकला में है. जबकि कालापहाड़ में बंका नाला है. बीडीओ सही जगह स्थल निरीक्षण कर गये थे. लेकिन अचानक स्पॉट बदल दिया गया. अगर सतबहिनी नाला पर पुलिया का निर्माण होता, तो इससे सूठा और लोइंगा पंचायत जुड़ जाती और नावाजयपुर तक आसानी से पहुंचा जा सकता था. बाद में इसका जुड़ाव तरहसी और मनातू से भी हो जाता.

कररकला 2013 में बना है आदर्श गांव

कररकला को 2013 में क्षेत्रीय विधायक द्वारा आदर्श ग्राम का दर्जा दिया गया था. यह गांव आदिवासी बाहुल्य है. जबकि विकास के नाम पर यहा का कार्य शून्य है. इस गांव की मुख्य सड़क बदहाल है. पुलिया का निर्माण ग्रामीणों के हित में था, जिससे सभी काफी खुश थे. लेकिन सतबहिनी नाला पर शिलान्यास न होकर बंका नदी पर पुल का शिलान्यास होने से सभी ग्रामीण आहत हैं.

अवैध ढंग से पुलिया को किया गया शिफ्ट: निरंजन पांडेय

सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण निरंजन पांडेय ने यह भी कहा कि सतबहिनी नाला पर पुलिया निर्माण कार्य को अवैध ढंग से शिफ्ट कर कालापहाड़ के बंका नाला पर कर दिया गया है. इसमें सूठा के मुखिया की ठेकेदार के साथ संलिप्तता है.

जहां पर पुलिया बनायी जा रही है, उसमें दोनों ओर एप्रोच पथ नहीं है. निजी जमीन पड़ता है. ऐसे में पुलिया का सदुपयोग कभी नहीं हो सकता. शिलान्यास के समय सड़क बनाने के लिए जमीन नहीं दिये जाने से निर्माण कार्य शिलान्यास स्थल से 200 मीटर दूर किया जा रहा है. पुलिया की लागत 66 लाख है और टॉप लेबल पर कार्य हो चुका है. इसके लिए 22 लाख रूपये की निकासी भी कर ली गयी है.

क्या कहना है विभाग का

पुलिया का निर्माण केन्द्रीय विशेष सहायक योजना मद से ग्रामीण विकास विभाग (विशेष प्रमंडल) द्वारा कराया जा रहा है. विभाग के कार्यपालक अभियंता एस.के दुबे ने कहा कि उपायुक्त के यहां से इस संबंध में जांच का आदेश जारी किया गया है.

सदर एसडीओ के नेतृत्व में जांच समिति जांच कर रही है. इसका प्रतिवेदन अबतक विभाग को नहीं मिला है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है. पुलिया बनाने में जिस स्तर पर चूक हुई होगी, जांच रिपोर्ट में अगर उनकी गलती सार्वजनिक हुई तो कार्रवाई की जाएगी और सही जगह पर निर्माण कार्य होगा.

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