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पलामू : ग्रामीणों के लिए पैसा नहीं प्रतिष्ठा का सवाल बना शौचालय, प्रेरित होकर खुद कर रहे निर्माण

शौचालय निर्माण के लिए ग्रामिणों को किया जा रहा प्रेरित

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Daltonganj : शौचालय पैसा नहीं बल्कि प्रतिष्ठा का सवाल है और इसे सही साबित किया है चैनपुर प्रखंड अंतर्गत बसरिया कला ग्राम पंचायत के दुलसुलमा और सोकरा के ग्रामीणों ने. ग्रामीणों ने खुद से शौचालय निर्माण का बीड़ा उठाया और शौचालय का निर्माण किया है. अब ये दोनों गांव ओडीएफ के कगार पर हैं और आने वाले समय में ये गांव स्वच्छ भारत मिशन के मॉडल गांव के रूप में विकसित हो सकते हैं.

शौचालय निर्माण के लिए ग्रामिणों को किया जा रहा प्रेरित

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के सहयोग से गांव में शौचालय का निर्माण हुआ है. जेएसएलपीएस के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी सत्यप्रिय तिवारी ने बताया कि कुल 40 गांव में जेएसएलपीएस काम कर रहा है, जिसमें 31 गांव मॉडल गांव के राह पर हैं. गांवों में लाभुकों को जागरूक कर स्वयं से शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसके बाद लाभुक स्वयं से पैसा लगा कर शौचालय का निर्माण करते हैं.

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क्या कहना है ग्रामीणों का

सोकरा गांव की सक्रिय महिला प्रमिला देवी ने बताया कि शौचालय निर्माण के पहले ग्रामीणों को इसके फायदे बताये जाते हैं. फिर ग्रामीण स्वयं से शौचालय निर्माण कार्य शुरू करते हैं. निर्माण में लोगों को 12,000 रुपये के लगभग का खर्च आता है. गौरतलब है कि सोकरा गांव में अभी तक 54 शौचालय बने हैं.

दुलसुलमा गांव की सक्रिय महिला उषा देवी ने ग्रामीणों को जागरूक करके 50 शौचालय का निर्माण कराया है. सभी शौचालय अपने आप में उदाहरण हैं. बेहतर काम के लिए उषा को स्वच्छता किट देकर सम्मानित भी किया गया.

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स्वच्छता किट देकर लोगों को किया गया सम्मानित

शनिवार को दुलसुलमा और सोकरा गांव में जिला प्रेरक नवाज नूर, जिला समन्वयक कनक राज, जीसेलपीएस के बीपीएम सत्य प्रिय तिवारी और क्लस्टर कोऑर्डिनेटर धर्मवीर ने शौचालय का अवलोकन किया. इस दौरान करीब एक दर्जन लाभुकों को स्वच्छता किट देकर सम्मानित किया गया.

सेल्फ मॉडल सबसे बेहतर

उपायुक्त अमीत कुमार का कहना है कि शौचालय सिर्फ शोभा की वस्तु न बने, बल्कि इसका बेहतर इस्तेमाल हो. शौचालय लोगों की मान-सम्मान और प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है. इसलिए जरूरी है कि लाभुक स्वयं से शौचालय का निर्माण कर स्वच्छता का मॉडल विकसित करें.

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