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पलामू: पारा कर्मियों की हड़ताल का कोविड जांच पर असर, 80 प्रतिशत से घटकर हुआ 40 फीसदी  

Palamu: अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मचारियों की हड़ताल से मरीज भगवान भरोसे रह गये हैं. पलामू के 5 सौ सहित राज्य के 10 हजार कर्मी पिछले 72 घंटे से अधिक समय से हड़ताल पर हैं. इससे कोरोना जांच पर से लेकर अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा है. कोविड जांच 40 प्रतिशत पर पहुंच गयी है.

अपनी मांगों पर जोर डालने के लिए तीन दिनों से अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मचारी पलामू में सीएस कार्यालय के समक्ष आन्दोलन पर बैठ रहे हैं. शुक्रवार को चौथे दिन भी सभी हड़ताल पर डटे रहे. झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्साकर्मी संघ का कहना है कि राज्य सरकार हड़ताल खत्म करने के लिए कोई पहल नहीं कर रही है. लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या आपदा की इस घड़ी में उनका हड़ताल पर जाना सही है? क्योंकि स्वास्थ्य सेवा अनिवार्य सेवा के तहत आती हैं.

अब सरकार इसे आपराधिक कृत्य मानने पर विचार कर रही है. कोरोना काल में सैंपल लेने से रिपोर्टिंग तक की जिम्मेदारी अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मी ही संभाल रहे थे. हड़ताल पर जाने वालों में लैब टेक्नीशियन भी हैं.

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ऐसे में कोरोना की जांच प्रभावित हुई है. प्रत्येक दिन ट्रूनेट से 80 जांच करने वाला पलामू स्वास्थ्य विभाग में यह आंकड़ा 30-40 पर आ गया है. एएनएम और जीएनएम के हड़ताल में शामिल होने से प्रसव कार्य प्रभावित हुआ है.

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पलामू में सात सौ करीब पहुंचे मरीज, 383 हैं एक्टिव मामले

जिले में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. अबतक 698 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. बुधवार को जहां रिकॉर्ड 51 मरीज मिले, वहीं गुरूवार को 30 मरीजों की पुष्टि हुई. इसमें रांची रिम्स से 26 एवं पलामू में ट्रूनेट से जांच के बाद 4 मरीज पॉजिटिव पाये गये.

डीसी ने ली स्थिति की जानकारी

पिछले चार दिनों से अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मचारियों की हड़ताल से बिगड़ी स्थिति और उससे निपटने में स्वास्थ्य विभाग के प्रयास की आज डीसी शशि रंजन ने जानकारी ली. उपायुक्त ने जिले के सिविल सर्जन डा. जॉन एफ कनेडी, अस्पताल अधीक्षक और डीपीएम दीपक गुप्ता से स्थिति से अवगत हुए. डीसी ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मियों की मदद से आपातकालीन सेवा (एसएनसीयू) सहित कोविड जांच को नियमित कराएं. ताकि स्थित नियंत्रण में रहे.

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दक्ष नहीं हैं आउटसोर्सिंग कर्मी

स्वास्थ्य विभाग अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मचारियों की जगह आउटसोर्सिंग कर्मियों से सेवा ले रही है. सूत्रों का कहना है कि आउटसोर्सिंग कर्मी स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह लागू कराने में दक्ष नहीं हैं. उनकी स्पीड भी पारा मेडिकल कर्मचारियों की तरह नहीं है. इससे जांच और इलाज में समय लगता है.

अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मचारियों की मांग

अनुबंधित पारा मेडिकल कर्मियों को स्थाई करें. स्थाई होने तक समान काम समान वेतन लागू करें.

ईपीएफ की कटौती हो और आउटसोर्सिंग कर्मियों के बकाये का भुगतान हो.

कोविड-19 में लगे कर्मियों को बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिले.

अनुबंध कर्मियों की मौत पर वह सारे लाभ मिले, जो स्थाई कर्मचारी को मिलते हैं.

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