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पलामू: मेहनत-मजदूरी कर बेटे को बनाया दारोगा, अभिभावक संघ ने किया सम्मानित

बेटे की पढ़ायी के लिए मवेशियों को भी बेच दिया

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Palamu: कहते है अगर इरादा मजबूत हो तो मंजिल मिल ही जाती है. कुछ ऐसी ही ढृढ निश्चय वाली महिला हैं सबुचनी देवी, जिसने खुद मेहनत-मजदूरी की, मुफलिसी में जिंदगी काटी, लेकिन अपने बेटे विमलेश कुमार महतो को ऐसी जिंदगी की आज उन्हें विमलेश पर नाज है. दरअसल, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) की परीक्षा में पलामू जिले से दर्जनों गरीब युवकों ने पास कर सफलता का परचम लहराया है. इनमें से खास हैं जिले के पंडवा प्रखंड के बासु पंचायत के लोहारा गांव निवासी विमलेश कुमार महतो, जिनकी मां ने बहुत मेहनत से उन्हें पढ़ाया. विमलेश को पढ़ाने कराने के लिए उसकी मां सबुचनी देवी अपने मवेशियों को बेच दिया था.

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सबुचनी को अभिभावक संघ ने किया सम्मानित 

मवेशियों को बेचकर बेटे को दारोगा बनाने वाली सबुचनी देवी को शुक्रवार को एक सादे समारोह के दौरान पलामू अभिभावक संघ ने उसके घर जाकर सम्मानित किया. संघ के अध्यक्ष सह अधिवक्ता किशोर कुमार पांडेय ने कहा कि किसान के लिए उसका बैल उसके बेटे के समान ही होता है, लेकिन पढ़ायी के आगे सबुचनी ने ऐसा नहीं सोचा और अपने बैल को बेच दिया.  खुद मजदूरी की और बेटे को शिखर तक पहुंचाया.

भगवान ने उसकी मेहनत का इनाम दिया: सबुचनी

बातचीत के दौरान अपनी गरीबी पर आंसू बहाते हुए सबुचनी ने कहा कि बहुत कष्ट से बेटा को पढ़ाया है. आज भगवान ने उसकी मेहनत को स्वीकार किया है. बेटे को पढ़ायी कराने के दौरान सामने आयी मुसीबतों से उसने कभी हिम्मत नहीं हारी. पढ़ायी खर्च जुटाने के लिए मजदूरी करने के साथ-साथ मवेशियों को भी बेच दिया.

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