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पलामू प्रमंडल में है मात्र एक ब्लड बैंक, जो ले रहा है अंतिम सांसें  

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Palamu : बेसहारों व जरूरतमंदों को नया जीवन देने वाला पलामू प्रमंडल का एक मात्र ब्लड बैंक खुद अंतिम सांस ले रहा है. कहने को तो यह ब्लड बैंक है, लेकिन यहां एक यूनिट तक खून मौजूद नहीं है. पिछले तीन महीने से रक्त नहीं रहने की वजह से ब्लड बैंक अब मात्र नाम का ब्लड बैंक रह गया है. बिना ब्लड का ब्लड बैंक कैसा होगा? यह स्वयं में एक ज्वलंत सवाल है.

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हर दिन निराश लौट रहे मरीज और उसके परिजन 

हादसों के बाद बीमारी में मरीजों को ब्लड की आवश्यकता पड़ रही है. जख्मी और बीमारी से प्रभावित रोगियों के परिजन बेतहाशा ब्लड बैंक का रुख करते हैं. लेकिन यहां पहुंचने पर उन्हें घोर निराशा हाथ लग रही है. ऐसे में ब्लड को लेकर रोगी से ज्यादा परिजन ही परेशान रह रहे हैं.

उधर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को तो खून के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में प्रमंडलीय अस्पताल के ब्लड बैंक में एक यूनिट भी ब्लड का नहीं होना, चिंताजनक ही नहीं दुर्भाग्यपूर्ण भी है. अति जरूरतमंद रोगी की ब्लड के बिना जान भी जा सकती है.

परिजनों या पहचान वालों के रक्तदान के बाद चढ़ता है रोगी को रक्त

ब्लड बैंक आकर निराश होने वाले रोगी के परिजन अपने रिश्तेदार या फिर खुद रक्तदान करते हैं. उसी खून को रोगी को चढ़ाया जाता है. अगर रिश्तेदार या परिजन का ग्रुप मैच नहीं करता है तो सोशल मीडिया पर रक्तदान के लिए गुहार लगायी जाती है. सोशल मीडिया पर आग्रह देखकर कोई न कोई भलामानस अस्पताल पहुंच जाता है और रक्तदान कर रोगी की जान बचाता है.

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पति ने बचायी पत्नी की जान 

27 मई को अपनी गर्भवती महिला महजबी को प्रसव कराने के लिए हुसैनाबाद के इस्लामगंज मुहल्ला निवासी नेहाल कुरैशी ने ब्लड बैंक में ‘बी’ पॉजिटिव रक्तदान किया. पांकी थाना के जशपुर गांव निवासी बालदेव सिंह ने अपनी गर्भवती पत्नी मालती देवी के प्रसव के लिए रक्तदान किया. गौरतलब है कि यदि इन दोनों के पास अपना ब्लड नहीं होता तो महिलाओं की जान जोखिम में पड़ जाती. ऐसे में जरूरत है ब्लड बैंक को तुरंत प्रभावी बनाने की.

सीआरपीएफ जवान ने बचायी महिला की जान 

रक्त की लगातार कमी होने की वजह से 26 मई को प्रसव पीड़ा के बाद एक महिला और उसके जुड़वा बच्चों को बचाना मुश्किल हो गया था. रक्त की कमी महसूस की जा रही थी.

सूचना मिलने पर सीआरपीएफ 134 बटालियन के जवान जी.डी. मुकेश कुमार ने रक्तदान कर जच्चा और बच्चा को नयी जिंदगी दी. जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत लोइंगा निवासी मो. जुनेद आलम की पत्नी खुश्बू खातून ने प्रसव पीड़ा के बाद जुड़वा बच्चे को जन्म दिया.

प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव होने के कारण खुश्बू को बचाने के लिए रक्त की आवश्यकता पड़ गयी थी. सूचना मिलने पर सीआरपीएफ जवान ने रक्तदान किया. बाद में रक्त चढ़ाकर खुशबू और उसके नवजात को नयी जिंदगी दी गयी.

5 माह में 4300 यूनिट बैंक को मिल चुका है ब्लड

सदर अस्पताल में संचालित जय जवान ब्लड बैंक को एक जनवरी से 30 मई 2019 तक साढ़े 4300 यूनिट बैंक को ब्लड मिल चुका है. बावजूद यह बैंक रक्तविहीनता का शिकार हो गया है. यह स्थिति कैसे बनी? इसका माकूल जवाब किसी के पास नहीं है.

इससे स्पष्ट है कि रक्त के एवज में रक्त देने की व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई या यू कहें कि अति जरूरतमंदों या पैरवी आदि के बलबूते वाले जरूरतमंद रोगी को बैंक ने ब्लड उपलब्ध करा दिया. इसके एवज में रक्त नहीं लिया. यह सिलसिला लगातार जारी रहा.

इसका परिणाम है कि ब्लड बैंक आज रक्तविहीन हो गया है. पूरे मामले की जांच के बाद ही ब्लड बैंक के कंगाल होने के मामले से परत हटेगी.

रक्त की मांग ज्यादा व आमद कम : सीएस 

जिले के सिविल सर्जन डॉ.जॉन एफ कनेडी ने बताया कि ब्लड बैंक से रक्त की मांग ज्यादा व आमद कम है. इसलिए सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी हो गई है.

सरकारी गाईड लाईन के मुताबिक, थिलिसिमिया के रोगी को सीधे ब्लड देना पड़ता है. बैंक को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है. सामाजिक संगठन, सामाजसेवी, संस्थायें समेत हर धर्म व समाज के हर तबका के लोग हर दिन रक्तदान करें.

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