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पलामू: कथित बकोरिया पुलिस-नक्सली मुठभेड़ कांड की जांच एक बार फिर तेज, अबतक 350 से लोगों से हुई पूछताछ

PALAMU : पलामू के चर्चित कथित बकोरिया पुलिस-नक्सली मुठभेड़ कांड की जांच एक बार फिर सीबीआई ने तेज कर दी गयी है. अबतक की जांच में सीबीआई ने 350 से अधिक लोगों की गवाही ली है. जांच के सिलसिले में सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर सहित कई बड़े अधिकारी पलामू जल्द ही पहंुचने वाले हैं. टीम द्वारा एक बार फिर घटनास्थल पर जाकर जांच करने की सूचना है. जांच टीम का नेतृत्व एएसपी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं.

कई बार मैनेज करने की हुई कोशिशरू जवाहर

मुठभेड़ कांड की सच्चाई सामने लाने की लड़ाई लड़ रहे मृत पारा टीचर उदय यादव के पिता जवाहर यादव ने कहा कि उन्हें मैनेज करने की कई बार कोशिश की गई. लेकिन वे न्याय के लिए प्रतिबद्ध हैं. जबतक मामले से पर्दा नहीं हट जाता, उनकी प्रयास अनवरत जारी रहेगा.

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अबतक 350 से अधिक से पूछताछ हुई पूरी

वर्ष 2018 से बकोरिया मुठभेड़ मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अबतक 350 से अधिक लोगों का बयान ले चुकी है. सीबीआई सूत्रों के अनुसार बकोरिया मुठभेड़ मामले की जांच लगभग पूरी है.

सीबीआई का पूरा सेटअप रांची शिफ्ट होकर बाकी की जांच रांची से होगी.विदित हो कि 8 जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया के भलवही घाटी में पुलिस-नक्सलियों के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 12 नक्सली मारे गए थे.

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22 दिसम्बर 2020 को टीम कर चुकी है घटनास्थल का दौरा

बीते 22 दिसंबर 2020 को सीबीआई की टीम बकोरिया घाटी के भलवही घाटिका दौरा कर चुकी है, जहां पर यह घटना घटित हुई थी. बताया जाता है कि मामले में पलामू के तत्कालीन डीआईजी, एसपी, लातेहार एसपी, तत्कालीन मनिका, सतबरवा और सदर थाना के थाना प्रभारी से पूछताछ सीबीआई कर चुकी है.

इधर एफएसएल, आईपीएस, कोबरा और सीआरपीएफ के अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी है. इस सिलसिले में कई बड़े अधिकारियों को नोटिस भेजा जाएगा. पलामू के तत्कालीन अभियान एसपी से भी पूछताछ होने वाली है.

मालूम हो कि डीआईजी और सदर थानेदार ने मुठभेड़ को फर्जी बता चुके हैं. जबकि मारे गए कुछ के परिजनों ने विरोधाभास बयान दिया है. कई के परिजन और जानने वाले सीबीआई के समक्ष गवाही नहीं दे रहे हैं.

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कौन-कौन मारे गए थे

मारे गए नक्सलियों में टॉप कमांडर आरके उर्फ अनुराग, उसका बेटा और भतीजा शामिल थे. 4 नाबालिग, एक पारा शिक्षक और उसका भाई भी मारे गये थे. हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने सीआईडी से जांच का जिम्मा लिया था. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जो अस्वीकृत हो चुकी है.

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