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पलामू: 180 वर्ष के इतिहास में पहली बार चैनपुर से नहीं निकली ऐतिहासिक रथयात्रा, सड़कें सूनीं

Palamu :  पलामू जिले के चैनपुर राजगढ़ से आज ऐतिहासिक रथयात्रा नहीं निकाली गयी. रथयात्रा निकालने के इतिहास में यह पहला मौका है जब कोरोना संक्रमण के कारण भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पवित्र रथयात्रा नहीं निकाली गयी. इस रथयात्रा में शामिल होने और रथों में लगे डोर को खींचने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते थे, लेकिन इस वर्ष उन्हें मायूसी हाथ लगी.

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कोरोना संक्रमण को देखते हुए आज दोपहर में चैनपुर राजगढ़ मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग के तहत भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा अर्चना की गयी. गर्भगृह में पंडित संतोष पाठक ने भगवान का श्रृंगार किया और आरती उतारी. बाद में पूजा अर्चना कर प्रसाद का वितरण किया गया.

इसमें चैनपुर रामगढ़ के युवराज विवेक भवानी सिंह के अलावा सुनील सिंह और विकास सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए. शिवनाथ साव सहित चैनपुर के कई लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए. कुछ लोग पूजा अर्चना के लिए भी मंदिर परिसर में पहुंचे. श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक-एक कर भगवान के दर्शन किए.

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चैनपुर गढ़ के युवराज विवेक भवानी सिंह ने कहा कि उनके गढ़ में मंदिर परिसर से आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को निकलने वाले पारंपरिक रथयात्रा को कोविड-19 को लेकर इस वर्ष स्थागित कर दिया गया. 180 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. परंपरा के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रथ यात्रा के एक दिन पूर्व सोमवार को भगवान जगन्नाथ स्वामी बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र एवं ठाकुर जी के समक्ष विधि-विधान से पूजा पाठ कर पुजारी द्वारा छप्पन भोग प्रसाद चढ़ाया गया. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रसाद वितरण किया गया.

रथयात्रा नहीं निकलने से चैनपुर, राजगढ़, चैनपुर बाजार क्षेत्र की सभी सड़कें सूनी रह गयी. क्षेत्र के लोगों में रथयात्रा नहीं निकलने से मायूसी का माहौल था. बताया जाता है कि 180 साल पहले राजा जगन्ना दयाल सिंह को पुरी मंदिर से बराबर प्रसाद आया करता था.

एक दिन राजा को भगवान जगन्नाथ जी का स्वप्न आया कि आप अपने यहां भी मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा पाठ कराए एवं रथ यात्रा का आयोजन करें. उसी के बाद से चैनपुर गढ़ में ऐेतिहासिक रथ यात्रा की परंपरा शुरू हुई जो आज तीन पीढ़ी से लगातार चलती आ रही थी.

लातेहार में भी नहीं निकाली गयी रथयात्रा

उधर, लातेहार शहर के मेन रोड स्थित श्रीराधाकृष्ण मंदिर (ठाकुरबाड़ी) परिसर से भी रथयात्रा नहीं निकाली गयी. मंदिर परिसर में ही सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलराम की पूजा-अर्चना व महाआरती की गयी. मंगलवार की दोपहर करीब दो बजे से शुरू हुआ, जिसमें बतौर मुख्य यजमान की भूमिका में योगेश प्रसाद व उनकी धर्मपत्नी रीना देवी रही.

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