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पलामू: हैदरनगर में सिंचाई के आधा दर्जन स्रोत बेकार, किसी की छह तो किसी में दो वर्ष से नहीं हुई मरम्मत

Dilip kumar

Palamu ; मौसम के दगा दे जाने पर पलामू जिले के किसानों को हर वर्ष सिंचाई की समस्या होती है. सूखे की मार झेलनी पड़ती है. बावजूद गांवों की छोटी छोटी सिंचाई योजनाओं की मरम्मत या फिर जीर्णोद्धार पर ध्यान नहीं जाता. जिले के हैदरनगर में कुछ इसी तरह की स्थिति है. इस इलाके के किसानों की आजीविका कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन इस प्रखंड क्षेत्र के आधा दर्जन सिंचाई स्रोत लंबे समय से क्षतिग्रस्त है और इनकी मरम्मत या फिर नया निर्माण पर किसी का ध्यान नहीं रह गया है.

दो वर्ष से क्षग्रिस्त है मुरही नाला

हैदरनगर प्रखंड के परता गांव के किसानों के सिंचाई का मुख्य साधन मुरही नाला है. उक्त नाला में बांध का निर्माण वर्ष 2007 में हुआ था. 2017 में भारी वर्षा की वजह से बांध टूट गया. किसानों ने जन प्रतिनिधियों व अधिकारियों को कई बार आवेदन .मगर कोई सुनवाई नहीं हुई. वर्ष 2018 में किसानों ने श्रमदान कर नाला पर बांध का निर्माण कराया. वह भी 2019 में भारी वर्षा की वजह से टूट गया. 2020 में सिंचाई कैसे होगी? इसे लेकर परता गांव के किसान परेशान हैं.

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4 सौ एकड़ भूमि होती है सिंचित

किसान पृथवीनाथ पांडेय ने बताया कि मुरही नाला से करीब 400 एकड़ भूमि सिंचित होती थी. मगर इसपर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. किसान नवीन विश्वकर्मा ने बताया कि मुरही नाला का बांध टूट जाने की वजह से किसानों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पायेगी. उन्होंने बताया कि इसके अलावा अन्य सिंचाई के साधन ब्रह्मदेवता आहर से 35 एकड़, बड़का आहर से 80 एकड़ व भलुहा आहर से 40 एकड़ भूमि की सिंचाई होती थी. मगर सभी आहर टूटे पड़े हैं.

आवेदन देने पर नहीं हुई कार्रवाई

किसान सत्यनारायण विष्वकर्मा ने बताया कि मुरही नाला व आहर के बांध की मरम्मत को लेकर किसानों ने कई बार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से मिलकर उन्हें आवेदन दिया है. मगर आज तक किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से पहले ही किसान टूट चुके हैं. अब सिंचाई के आभाव में धान की फसल नहीं हो पायेगी. जिससे किसान, उनके परिवार व पशुओं को भूखों मरने की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी.

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इस वर्ष भगवान भरोसे किसान

किसान सह पूर्व मुखिया गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि परता गांव के सभी सिंचाई के श्रोत नाकाम हो गये हैं. उन्होंने कहा कि मुरही नाला व तीन आहरों से ही किसानो की भूमि सिंचित होती थी. अब सभी नाला व आहर का बांध टूटा हुआ है. परता लघु नहर का निर्माण 30 वर्ष में भी पूरा नहीं हो सका है, जबकि हरेक पांच वर्ष के बाद इस लघु नहर में एक करोड़ 35 लाख रुपए खर्च हो चुका है. मगर परता तक पानी नहीं पहुंचा. किसानों को इस वर्ष सिंचाई के लिए भगवान भरोसे रहना पड़ेगा.

सदाबह नदी का चहका छह वर्ष से है टूटा

मुरही नाला की तरह की सदाबह नदी पर बना चहका छह वर्ष से टूटा पड़ा है. इस चहका के सही सलामत रहने पर बुद्धू बिगहा, बभंडी, हैदरनगर, भाई बिगहा आदि गांवों की करीब एक हजार एकड़ जमीन सिंचित होती थी. पिछले दिनों में खरगड़ा में लगे प्रशासन आपके द्वार कार्यक्रम के तहत आयोजित जनता दरबार में मामले को लेकर जिले के डीडीसी बिन्दू माधव सिंह को आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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