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पलामू: 20 साल से फूस की झोपड़ी में रह रहा मुसहर परिवार, सभी सरकारी लाभ से वंचित

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Dilip Kumar
Palamu: मुसहर परिवारों के विकास के लिए सरकार द्वारा कई तरह की योजनाएं चलायी गयी हैं. लेकिन पलामू जिले के पांकी में आठ दस सदस्यों का एक मुसहर परिवार की स्थिति पिछले 20 सालों में भी सुधर पायी है. डंडारकला स्थित मजदूर किसान डिग्री महाविद्यालय के पीछे यह परिवार फूस की झोपड़ी में लंबे समय से रहता आ रहा है.

दुधेश्वर मुसहर छोटी सी झोपड़ी में पिछले पंद्रह-बीस वर्षों से अपनी पत्नी मालो, पुत्र सलमान मुसहर (16) रूपेश मुसहर (20) पुत्री अनिता कुमारी (22) काजल कुमारी (18) रूपा कुमारी (11) और लाल बाबू मुसहर (दामाद-25वर्ष) के साथ रह रहा है. यह परिवार गरीबी में जीवन तो काट ही रहा है साथ ही इन्हें किसी तरह की कोई सरकारी सुविधा भी नहीं मिल रही है.

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मांगे खाय वाला आदमिन कहां से देब एतना पईसा

दुधेश्वर मुसहर के पास राशन कार्ड तक नहीं है जिसकी वजह से उसे और उसके परिवार को राशन, किरासन भी आज तक नहीं मिला. सिर्फ राशन ही नहीं सभी तरह की सरकारी सुविधाओं से यह परिवार महरूम है.

सरकारी सुविधाओं के बारे में पूछे जाने पर दुधेश्वर की पत्नी मालो बताती है कि राशन कार्ड बनाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन बिचैलिये द्वारा कार्ड बनाने के नाम पर पांच हजार रुपया मांगे जाने पर उन्होंने कहा कि हमनी मांगे खाय वाला आदमिन कहां से देब एतना पईसा?

सरकार से आवास की मांग

दुधेश्वर मुसहर का कहना है कि मेरे पास जमीन नहीं है. यहीं कॉलेज के पास गैरमजरूवा जमीन में झोपड़ी बनाकर काफी समय से रहते आ रहे हैं. दोनों झोपड़ी में आठ-नौ परिवार रहते हैं. सुअर पालन और अपना जातीय पेशा ही दुधेश्वर के परिवार का जीवन जीने का मुख्य सहारा है.

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मुखिया ने भी नहीं ली सुध

अभी तक आवास नहीं मिलने के संबंध में बताया कि एससीसी डाटा में उसका नाम नहीं है. इस परिवार में कोई पढ़ा लिखा नहीं होने के कारण उनका नाम आज तक आवास की सूची में नहीं जुड़ सका.

पंचायत के मुखिया ने भी कभी इस परिवार को कोई लाभ दिलाने का प्रयास नहीं किया. इस परिवार के सभी सदस्यों के पास आधार कार्ड है. दुधेश्वर और उसकी पत्नी का नाम मतदाता सूची में भी दर्ज है और कई बार दोनों ने मतदान भी किया है.

बरसात के मौसम में होती है भारी कठिनाई

बरसात के मौसम में जिंदगी इस परिवार की थम सी जाती है. इन दिनों बारिश हो रही है. इससे उनकी स्थिति काफी भयावह हो गयी है. ऐसी स्थिति में मजदूर किसान डिग्री महाविद्यालय, डंडारकला का सीमेंट सीट का शेड ही इनका सहारा बनता है.

यह परिवार कॉलेज अवधि में अपना समान समेट लेता है और शाम होते ही शेड इसका आशियाना बन जाता है. दुधेश्वर बताता है कि सुबह होते ही सब परिवार अलग-अलग गांव में भीख मांगने निकल जाता है. यही जातीय मूल पेशा भी है. परिवार ने बताया कि जब काम मिलता है तो वे सभी मजदूरी का भी काम कर लेते हैं. घर नहीं होने से उन्हें काफी परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि सरकार एगो घर दे देत त हमनी सब बढ़िया से रहती.

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एसीसी डाटा में नाम जोड़ा जाएगा, राशन भी दिलाया जाएगा: मुखिया

डंडारकला की मुखिया अंती देवी ने बताया कि मुसहर परिवार के रहने की जानकारी मिली है. उन्हें आवास दिलाने के लिए उनका नाम एसीसी डाटा में जोड़ा जाएगा. जहां तक राशन नहीं मिलने की बात है तो इस संबंध में जल्द कार्रवाई की जायेगी. उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्यान्न मुहैया कराया जायेगा. सारे लोगों के नाम ऑन लाइन जोड़कर जल्द राशन कार्ड भी मुहैया करा दिया जाएगा.

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