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पलामू : इस वर्ष की अंतिम नेशनल लोक अदालत में 546 मामलों का निष्पादन

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Palamu : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर में लगी इस वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को 546 मामले निपटाये गये. मामलों के निपटारे के लिए आठ पीठों का गठन किया गया था. इसके अतिरिक्त एक पीठ अलग से ‘मे आई हेल्प यू’ से संबंधित थी. जिले के हुसैनाबाद और छतरपुर अनुमंडल में भी एक-एक पीठ अलग से गठित की गयी थी. वहां भी मामले निपटाये गये. नेशनल लोक अदालत में 674 मामले निपटारे के लिए रखे गये थे, लेकिन उनमें से 546 का ही निष्पादन किया जा सका. इसमें 344 मामले प्रीलिटिगेशन से संबंधित थे, जबकि 202 मामले व्यवहार न्यायालय में लंबित थे. बैंकों में लंबित 460 मामलों में से 329 मामलों का निपटारा किया गया. इसके अलावा बीएसएनएल के 15 और वाटर बिल से संबंधित एक मामले का निपटारा किया गया.

बैंकों के मामलों में एक करोड़ रुपये से अधिक का हुआ सेटलमेंट

बैंकों के 329 मामलों के निपटारे के बाद एक करोड़ 41 लाख 21 हजार 909 रुपये का सेटलमेंट किया गया, जबकि 67 लाख 38 हजार 405 रुपये का रियलाइजेशन हुआ. इसी तरह कोर्ट में लंबित 202 मामलों में दो मामले एमएसीटी के निष्पादन के फलस्वरूप छह लाख 15 हजार रुपये का सेटलमेंट हुआ. दो परिवारिक विवाद भी निपटाये गये. 58 आपराधिक वादों, जो कोर्ट में लंबित थे, का निपटारा किया गया. बीएसएल के 14 मामलों में 14 लाख 52 हजार 894 रुपये राजस्व प्राप्त हुआ. इससे पूर्व पूर्वाह्न में नेशनल लोक अदालत का उद्घाटन पीडीजे की अनुपस्थिति में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय बीडी तिवारी, प्रथम जिला जज सह प्राधिकार के प्रभारी अध्यक्ष डीके पाठक, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद तिवारी, महासचिव सुबोध कुमार सिन्हा एवं न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ता द्वारा संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया गया.

पलामू : इस वर्ष की अंतिम नेशनल लोक अदालत में 546 मामलों का निष्पादन
मामलों का निपटारा करते पीठ के सदस्य.

मुकदमेबाजी से बचें, सुलह-समझौता का रास्ता चुनें : पाठक

प्रथम जिला जज सह प्राधिकार के प्रभारी अध्यक्ष डीके पाठक ने कहा कि मुकदमेबाजी से लोगों को बचना चाहिए. हमें सुलह-समझौते से मामले का निस्तारण कराना चाहिए. लोक अदालत सुलह-समझौता का सशक्त मंच है. लोक अदालत में मामले के निस्तारण से समय, शक्ति व पैसे की बचत होती है. कार्यक्रम की अध्यक्षता जज डीके पाठक ने की, जबकि संचालन प्राधिकार के सचिव प्रफुल्ल कुमार ने किया. मौके पर अन्य लोगों के अलावा व्यवहार न्यायालय के अधिकतर न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, बैंक, वन विभाग, उत्पाद, विद्युत के अधिकारी और मामले से संबंधित पक्षकार भी उपस्थित थे.

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