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पलामू: ऋण चुकाने के बाद भी बैंक नहीं लौटा रहा दिव्यांग व्यवसायी की जमीन का केवाला

ऋण की मियाद पूरी होने तक दिव्यांग व्यवसायी को सारी राशि एडजस्ट कर 2,80,000 जमा करने थे. लेकिन बैंक ने व्यवसायी से 3,00,000 रुपये जमा कराये.

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Palamu :  प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ गरीबों की गरीबी मिटाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर मोदी के राज में बैंकों का रवैया ठीक नहीं है. बैंक अधिकारी गरीबों को सताने से भी बाज नहीं आ रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण भारतीय स्टेट बैंक की मझिआंव स्थित बरडीहा शाखा से जुड़ा हुआ है.

बता दें कि जितेन्द्र प्रसाद नामक एक दिव्यांग व्यवसायी, जो आंख से पूरी तरह से लाचार है,  ने कुछ साल पहले एसबीआई के मझिआंव स्थित बरडीहा शाखा से पांच लाख रुपये का कैश क्रेडिट ऋण लिया था. ऋण के बदले में उसने एलआईसी के कागज और जमीन का केवाला बैंक में मॉर्गेज रखा. ऋण की मियाद पूरी होने तक दिव्यांग व्यवसायी को सारी राशि एडजस्ट कर 2,80,000 जमा करने थे. लेकिन बैंक ने व्यवसायी से 3,00,000 रुपये जमा कराये.

पलामू: ऋण चुकाने के बाद भी बैंक नहीं लौटा रहा दिव्यांग व्यवसायी की जमीन का केवाला

20,000 रुपये बैंक द्वारा नहीं लौटाये गये

जब व्यवसायी ने अपने खाते का व्यौरा चेक किया तो पाया कि बैंक ने उनके खाते में 20,000 रुपये अतिरिक्त जमा ले लिये है. इसके बाद भुक्तभोगी दिव्यांग व्यवसायी ने एसबीआई मैनेजर से संपर्क साधा तो उसे 20,000 रुपये का एक चेक दिया गया और उसे कहा गया कि यह पैसा आपको चेक के माध्यम से मिल जायेगा, लेकिन अभी तक व्यवसायी को जमा किये गये अतिरिक्त 20,000 रुपये बैंक द्वारा नहीं लौटाये गये.

इधर बैंक ने संबंधित व्यवसायी को नो ड्यूज का कागज भी दे दिया है. लेकिन ऋण के एवज में  मॉर्गेज किये गये जमीन का केवाला और 20,000 रुपये अभी तक वापस नहीं दिये गये हैं. व्यवसायी को ऋण चुकता किये हुए दो माह से भी उपर हो गये. फिर भी वह बैंक का चक्कर काटते-काटते परेशान है.  ऐसे में परेशान व्यवसायी ने अपनी व्यथा एसबीआई के कचहरी स्थित व्यवसाय शाखा में जाकर एजीएम को सुनायी,  तो पल भर में व्यवसायी की उम्मीद जग गयी किसमस्या का हल हो जायेगा. लेकिन यहां भी सुनवाई नहीं हुई.

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चेम्बर ने मामले को गंभीरता से लिया

व्यवसायी जितेन्द्र प्रसाद के मामले को पलामू चेम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने गंभीरता से लिया है. चेम्बर अध्यक्ष आनंद शंकर ने बैंक शाखा को एक पत्र भेजकर दो दिनों के भीतर जितेन्द्र प्रसाद के घर जाकर जमीन का केवाला और 20 हजार का चेक वापस करने की नसीहत दी है.  श्री शंकर ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो संबंधित शाखा प्रबंधक और डालटनगंज सर्किल की सारी कहानी एसबीआई के चेयरमैन तक चेम्बर पहुंचाने को वाध्य होगा.

श्री शंकर ने बैंक के रवैये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि स्टेट बैंक अब मानवता भी भूल रहा है। उन्होंने  कहा किअगर हम व्यवसायि‍यों को कोई बैंक कर्ज देता है तो वह हमें मजबूर न समझे, क्योंकि हमारे पैसे और व्यवसाय से ही बैंक चलते हैं

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