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पलामू : मेडिकल कॉलेज में नामांकन अधर में लटका, एनएमसी से रिकॉगनाइजेशन मिलने की संभावना कम

Palamu : पलामू के सांसद वीडी राम ने कहा कि राज्य सरकार की लापरवाही से पलामू मेडिकल कॉलेज में नामांकन अधर में लट गया है. मूलभूत सुविधाओं और शिक्षकों के अभाव के कारण ऐसी स्थिति बनी है. ऐसी स्थिति में एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमिशन) से रिकोगनाइजेशन मिलने की संभावना क्षीण हो गयी है. सांसद गुरूवार को मेदिनीनगर में अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे.

सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश भर में 17 आई.आई.टी. एवं 17 एम्स सहित जगह-जगह पर अनेकों मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी, उसमें से पलामू मेडिकल कॉलेज भी एक था.

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इसका शिलान्यास झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 23 फरवरी 2017 को किया था. वर्ष 2019 में पहले बैच का नामांकन हुआ था, परंतु कॉलेज में मूलभूत कमियों के चलते एनएमसी ने पिछले वर्ष मान्यता नहीं दी.

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इस वर्ष भी कॉलेज में शिक्षकों की कमी है. कुछ नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, परंतु वे एनएमसी के अनुसार पूर्ण नहीं हैं. कॉलेज में लैब की समस्या का समाधान नहीं किया गया.

अगर कॉलेज की स्थिति इसी प्रकार बनी रही तो, पिछले वर्ष के भांति इस वर्ष भी इसे 100 सीटों से वंचित रहना पड़ेगा और जिन छात्रों का नामांकन सत्र 2019 में हुआ है, उन्हें भी रिकॉगनाइजेशन मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा.

राज्य में डॉक्टरों की कमी पहले से है और अगर इसी प्रकार कॉलेज में नामांकन की प्रक्रिया को हर वर्ष रोक दिया जाएगा तो समस्याएं बढ़ती जाएंगी.

कॉलेज में असिस्टेंट और पैरामेडिकल स्टाफ, मेडिकल इक्विपमेंट और टेक्नीशियन न होने के कारण छात्रों को विषयों को समझने में काफी परेशानी होती है. कॉलेज में पुस्तकालय एवं पुस्तकालय कर्मी की भी व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण छात्र-छात्राओं को मेडिकल की महंगी किताबें खरीदनी पड़ती है.

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एनएमसी के आदेशानुसार एम.बी.बी.एस. विद्यार्थियों का अनिवार्य क्लिनीकल एक्सपोजर एवं हास्पिटल विजिट नहीं हो पा रहा है. छात्रावास में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली और सुरक्षा का भी अभाव है.

कॉलेज से अस्पताल 5 किमी दूर होने के बावजूद यातायात की कोई सुविधा नहीं है. सांसद ने कहा कि पूर्व में इन सारी कमियों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया है, लेकिन निदान नहीं हो पाया.

सांसद ने राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं के लिए भोजपुरी, मगही तथा हिंदी भाषा को भी क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में शामिल करने की मांग की. अभी जो भी भाषा इन परीक्षाओं के लिए शामिल की गई है, वह यहां की भाषा है ही नहीं और यहां के छात्र अंग्रेजी में परीक्षा नहीं दे सकते.

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यहां के छात्रों को भोजपुरी एवं मगही में परीक्षा देने की सुविधा नहीं देना चाहते हैं तो कम से कम हिंदी भाषा में छात्रों को परीक्षा देने की सुविधा हो.

मौके पर जिला सांसद प्रतिनिधि विजय ओझा, सांसद जिला कोऑर्डिनेटर संजय गुप्ता, आनंद सिंह, सांसद मीडिया प्रभारी सोमेश सिंह, चैनपुर सांसद प्रतिनिधि भोला पांडे, वरिष्ठ भाजपा नेता शिव कुमार मिश्रा, ईश्वरी पांडे, जय दुबे उपस्थित थे.

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Nayika

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