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पलामू : आंगन में बिजली ट्रांसफार्मर, जान माल के खतरे को लेकर तीन दशक से भयभीत हैं लोग

Palamu : पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड और लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के धावाडीह में आंगन में बिजली ट्रांसफर्मर लगने रहने से कुछ लोग पिछले 30 वर्ष से परेशान है. ट्रांसफर्मर में जब कभी स्पार्क होकर आग लगती है तो परिवार के लोग घर छोड़कर भाग जाते हैं. ट्रांसफर्मर के कारण लोग खाली जमीन पर मकान तक नहीं बना पा रहे हैं और एक ही कमरे में रहने को विवश हैं.

धावाडीह में शिव कुमार राम, वीणा देवी, संतोष चन्द्रवंशी, बिट्टू कुमार, बलदेव राम, लाला राम और अनुज राम बिजली ट्रांसफर्मर के कारण पिछले तीन दशक से परेशान हैं. 30 वर्ष पहले जब वीणा देवी की जमीन खाली थी तो वहां विद्युत विभाग बिजली ट्रांसफर्मर लगा दिया था.

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कुछ वर्ष बाद वीणा देवी ने प्लाॅट नंबर 551, खाता नंबर 14 एवं थाना नंबर 275 के तीन डिसमिल के एरिया में एक कमरा बनाया और परिवार के साथ रहने लगी. लोगों के रहने के बावजूद विद्युत विभाग द्वारा बिजली ट्रांसफर्मर दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया.

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बिजली ट्रांसफर्मर हटाने के पक्ष में नहीं विद्युत विभाग

समय के साथ परिवार की आवश्यकता बढ़ने पर वीणा देवी खाली पड़ी अपनी जमीन पर मकान बनाना चाहती है, लेकिन इसमें बिजली ट्रांसफर्मर रोड़ा बन रहा है.

कई बार विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता सहित अन्य इंजीनियरों से लिखित और मौखिक तौर पर बिजली ट्रांसफर्मर हटाने की गुहार लगायी, लेकिन हर बार आग्रह को अनसुना कर दिया गया. महिला ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग बिजली ट्रांसफर्मर हटाने के पक्ष में नहीं है. कई मौकों पर आग्रह के बाद हटाने से इंकार किया जा चुका है.

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कई बार बनी जान माल के नुकसान की स्थिति

वीणा देवी ने बताया कि उसका परिवार 30 वर्ष से अधिक समय से बिजली ट्रांसफर्मर से परेशान हैं. कई बार बिजली ट्रांसफर्मर में आग लग चुकी है. जब भी आग लगती है, घर का दरवाजा बंदकर कर भाग जाते हैं. कई घंटे तक घर से बाहर रहना पड़ता है. आग लगने पर तेज आवाज होती है, जिससे भय का माहौल बना रहता है.

पड़ोस में रहने वाले अनुज राम ने कहा कि उनका मकान भी बिजली ट्रांसफर्मर से सटा हुआ है. जब भी स्पार्क होता है, उनके मकान मंे भी आग लगने की संभावना बन जाती है. इससे आग बुझने तक जान माल का नुकसान बना रहता है.

विद्युत एसडीओ ने नहीं दिया कोई जवाब

इधर, इस संबंध में विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन किया गया, लेकिन ईई के मोबाइल पर संपर्क नहीं हो पाया, जबकि एसडीओ ने फोन नहीं उठाया.

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