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पलामू: बांध के बहाव क्षेत्र नाला का अस्तित्व मिटाने की कोशिश, कंक्रीट से ढालकर बनाई जा रही सड़क

Palamu: जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से सटे नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 31 स्थित शाहपुर-नई मुहल्ला में करीब एक किलोमीटर लंबा सरकारी नाला का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है. जमीन माफिया इस प्राकृतिक जलस्त्रोत पर अतिक्रमण कर इसे मिटाने पर की कोशिश में लगे हैं. लगातार वास्तविक स्थिति से छेड़छाड़ कर अवैध कब्जा किया जा रहा है और नाले की जमीन बेची जा रही है. कभी 22 तक चौड़ा रहे इस नाले की चौड़ाई वर्तमान में 6 फीट में सिमट कर रह गई है. नाले के बीच में अतिक्रमण कर दीवार दे दी गई है और 22 फीट में बहने वाले इस नाले को 6 फीट के आकार में बदल दिया गया है.

विडंबना यह है कि इस 6 फीट के हिस्से को भी खुला नहीं छोड़ा गया है. इसके हिस्से को भी ढक कर इस पर कंक्रीट सड़क बनाई जा रही है. मुख्य सड़क (गढ़वा रोड) पर आने के लिए पूर्व से नाला के ऊपर बनी पुलिया की दीवार को भी तोड़ दिया गया है.

सड़क बनाने की स्वीकृति ना तो नगर निगम ने दी है और ना विभागीय स्तर पर हुई है. बावजूद जमीन माफिया नाला की जमीन बेचने के लिए बिक्री वाले हिस्से तक पहुंच पथ बना रहे हैं, ताकि खरीदारी को यह आसानी से पसंद आ आए और मोटी रकम कमाई जा सके. यह सब दिन के उजाले में हो रहा है, इससे स्पष्ट होता है कि इसमें प्रखंड प्रशासन की भी संलिप्तता है.

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पनेरीबांध का बहाव क्षेत्र हुआ संकुचित

बताते चलें कि शाहपुर-नई मुहल्ला से होकर बहने वाला यह सरकारी नाला पनेरीबांध से निकला है. इसकी लंबाई एक किलोमीटर से अधिक है. इस नाले से बांध का पानी बहकर कोयल नदी में आकर गिरता है.

अतिक्रमण होने से परेनीबांध का बहाव क्षेत्र संकुचित हो गया है. अगर कभी भारी बारिश हुई और पनेरीबांध टूटा तो प्रकृति से खिलवाड़ करने वाले आस पास के मकानों को भारी नुकसान हो सकता है. अगर तबाही हुई तो मुआवजा की मांग तेज होगी, लेकिन आज की जा रही गलती पर कोई मुखर नहीं है.

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प्राकृतिक आपदा से भी नहीं चेते

यहां यह भी बता दें कि वर्ष 2016 में भारी बारिश के कारण पनेरीबांध टूटने पर बहाव क्षेत्र में भारी तबाही मची थी. कई घर इसकी जद में आ गए थे. कई गरीबों का आशियाना उजड़ गया था. उस समय इस नाला की चौड़ाई 22 फीट तक थी. आज 6 फीट के आस पास है.

अगर घटना की पुनरावृति होती है तो समझ सकते हैं कि इस बार की स्थिति कैसी होगी? इस भयंकर त्रासदी के अभी 6 वर्ष ही बीते हैं, बावजूद कमाई के चकाचौंध में सारे नुकसान को भूलकर सरकारी संपति की बिक्री प्लाटिंग कर धड़ल्ले से की जा रही है.

मामले की जांच कर होगी कार्रवाई: अंचलाधिकारी

इस मामले में चैनपुर के अंचलाधिकारी संजय कुमार बाखला से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकारी नाला पर अतिक्रमण का मामला उनके संज्ञान में नहीं है. अगर ऐसी स्थिति है तो जांच कर इस संबंध में कार्रवाई की जाएगी.

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