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पलामूः हुसैनाबाद में मनरेगा की 24 योजनाओं में गड़बड़ी, पथरा की मुखिया को भेजा गया जेल

Palamu: पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड की पथरा पंचायत में 24 योजनाओं में गड़बड़ी की गयी है. रविवार को इस मामले में कार्रवाई करते हुए पथरा की मुखिया ललिता देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

इस मामले में हुसैनाबाद बीडीओ एमानुएल जय विरस लकड़ा ने पथरा पंचायत की मुखिया सहित 13 लोगों पर हुसैनाबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

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जेई सहित इन पर दर्ज किया गया है मुकदमा

पलामू उपायुक्त शशि रंजन के निर्देश पर हुसैनाबाद प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पथरा पंचायत की मुखिया ललिता देवी, जूनियर अभियंता विवेक कुमार, पंचायत सेवक नंद किशोर राम, रोजगार सेवक बिनोद चैधरी और संजय सूरज, मेसर्स अखिलेश कुमार, आपूर्ति कर्ता राहुल कुमार, ओम नमः शिवाय के कृष्णा कुमार, मेठ धर्मेंद्र मेहता, कमला वर्मा, गोविंद ठाकुर, राजेश कुमार, तुलसी कुमार मेहता आदि को आरोपी बनाया है. हुसैनाबाद थाना पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. मुखिया की गिरफ्तारी के बाद आरोपियों में हड़कंप है.

दो दर्जन योजनाओं में हुई है गड़बड़ी

पथरा पंचायत क्षेत्र में दो दर्जन मनरेगा की योजनाओं में गड़बड़ी उजागर हुई है. इस सिलसिले में मुखिया, ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत सचिव एवं कनीय अभियंता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज दी गयी है. साथ ही बीडीओ और बीपीओ को भी आर्थिक जुर्माना लगाया है.

विदित हो कि मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी एवं जिला दंडाधिकारी शशि रंजन ने संयुक्त रूप से अगस्त महीने में हुसैनाबाद के पथरा पंचायत पहुंचकर मनरेगा योजनाओं का निरीक्षण किया था.

इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों द्वारा योजनाओं में अनियमितता बरतने को लेकर शिकायत की गई थी. इसमें ज्यादातर कूप निर्माण में गड़बड़ियां से संबंधित शिकायत की गई थी. डीडीसी को जांच कर कार्रवाई करने को लेकर निदेशित किया गया था.

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पंचायत सचिव निलंबित

गड़बड़ी की पुष्टि के बाद पथरा पंचायत के पंचायत सचिव नंदकिशोर राम को निलंबित कर दिया गया एवं इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंसा कर दी गयी. इसके साथ ही संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर पर भी मनरेगा अधिनियम की धारा 25 के तहत प्रत्येक योजना में एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया.

वहीं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी पर भी मनरेगा अधिनियम के द्वारा 25 के तहत प्रत्येक योजनाओं में एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया.

जांच टीम में ये थे शामिल

जिला स्तरीय जांच दल हुसैनाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी, सहायक परियोजना पदाधिकारी एवं डीआरडीए के सहायक अभियंता शामिल थे. उक्त जांच दल के प्रतिवेदन के आधार पर सभी संबंधी से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी. प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने के कारण डीडीसी ने विभिन्न योजनाओं को रद्द कर दी थी.

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