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Palamu : छतरपुर के चिल्हो में एक माइंस को लेकर विवाद गहराया, आदिवासियों ने कहा- जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे

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Palamu : पलामू जिले के उग्रवाद प्रभावित एवं पत्थर खनन माइंस के रूप में चर्चित छतरपुर अनुमंडल क्षेत्र में माइंस संचालक और आम लोगों के बीच अक्सर विवाद होता रहता है. इन दिनों छतरपुर प्रखंड क्षेत्र के चिल्हो खुर्द गांव के खाता नं-23, प्लॉट नंबर-562 के गैरमजरूआ प्लॉट पर वर्ष 2017 में स्वीकृत हुए एक खनन लीज का मामला विवाद के कारण सुर्खियों में है. रेहला के अशोक कुमार सिंह और छतरपुर के मुकेश कुमार सिंह इसके लीजधारक हैं.

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लीज स्वीकृति के बाद वर्ष 2018 में स्थानीय ग्रामीणों ने लीजधारक को उक्त जमीन पर खनन करने से रोक दिया था. ग्रामीणों का आरोप था कि उक्त प्लॉट के अंदर उनके पारंपरिक देवता का गम्हेल स्थान है और बगल में देवी मंदिर व वन क्षेत्र तथा ग्रामीण आबादी भी गांव के करीब ही है. उस वक्त से ग्रामीणों के विरोध के बाद अब तक लीज क्षेत्र में खनन कार्य शुरू नहीं हुआ था.

ताजा विवाद तब उभरा, जब प्रशासन ने लीज क्षेत्र का सीमांकन करने की तिथि गत 20 जुलाई को निर्धारित की और संबद्ध नोटिस ग्रामीणों को भेजा. इस पर ग्रामीण उग्र हो गये हैं. उनका कहना है कि जान देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे.

ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन सीओ ने 1908 के इसी खतियान और नक्शा के आधार पर बैठे बिठाये रिपोर्ट किया था. उसी सीओ ने उस वक्त तेलियाडीह आदि गावों में भी खनन लीज की बावत बैठे बिठाये रिपोर्ट की थी. ग्रामीण विरोध के कारण तेलियाडीह का माइंस बंद है.

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विवाद का मुख्य जड़ है मुखिया!

ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया के कारण गलत ग्राम सभा हुई. पहले लीजधारक से मिल कर मुखिया ने सरकारी रजिस्टर पर विधिवत ग्राम सभा करवायी. जिसे तत्कालीन बीडीओ ने सत्यापित किया. फिर ग्रामीणों को मुखिया ने कहा कि ग्राम सभा सादा पन्ना पर करवाये हैं. यह मुखिया कागजी रूप से दर्जनों शौचालय को कागज पर बनवाने, मनरेगा की कई योजनाओं को फर्जी करवाने और शौचालय की राशि गबन करने का भी आरोपी है. इस बावत मुखिया का पक्ष नहीं मिल पाया.

फिर से की जायेगी स्थल की जांच: सीओ

छतरपुर के सीओ राकेश कुमार तिवारी ने इस मामले पर कहा कि स्थल पर ग्रामीणों का विरोध है तो ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी क्या करेंगे? हमलोग फिर से स्थल जांच कर ही आगे की करवाई करेंगे. वहीं छतरपुर डीएसपी शंभु कुमार सिंह ने कहा कि विधि व्यवस्था बनाये रखना पुलिस की जवाबदेही है. वे पूरे प्रकरण को बारीकी से देख रहे हैं.

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