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पलामू : नदी-तालाबों के बाद नहर के आस्तित्व पर भी खतरा, हर जगह है सिर्फ कचरा

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Dilip Kumar

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Palamu: देश में स्वच्छता अभियान को प्रभावी होने के बावजूद जलस्त्रोतों को भरने की कोशिश की जा रही है. जलस्त्रोतों के किनारों पर ही कूड़ा-कचरा डंप किया जा रहा है और उनका आस्तित्व मिटाने की तैयारी है. जिले में भीषण गर्मी पड़ रही है. करीब-करीब सारे जलस्त्रोत सूख चुके हैं. पलामू जिले में नदी, नाले और तालाबों के बाद अब नहर को भी भरने की कोशिश तेज हो गयी है.

उत्तरी कोयल नहर बनी कूड़ेदान

 पलामू: नदी-तालाबों के बाद नहर के आस्तित्व पर भी खतरा, हर जगह है सिर्फ कचरा
उत्तरी कोयल नदी

प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के बाद भी सरकारी महकमा तो दूर आम लोगों की आदतों में कोई नहीं सुधार नहीं हो पाया है. जिले के मोहम्मदगंज स्टेशन रोड के मध्य से होकर गुजरने वाली उत्तर कोयल मुख्य नहर को इन दिनों कूड़ेदान बना दिया गया है.

भीषण गर्मी के कारण नहर सूखी हुई है. नहर में पानी नहीं होने की वजह से लोग जगह-जगह कूड़े व गंदगी फेंक रहे हैं. साफ-सफाई करने के बजाय गंदगी नहर में फेंक दी जाती है, जिससे उत्तर कोयल मुख्य नहर कूड़ेदान में तब्दील नजर आ रही है.

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प्रतिबंधित प्लास्टिक, थर्मोकोल,होटलों के कचरे से पटी नहर

नहर में प्रतिबंधित प्लास्टिक, थर्मोकोल के पत्तल, होटल के गंदे पानी एवं अन्य सभी तरह के कचरों को इसमें सीधे डाला जाता है. बावजूद सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासनिक महकमा इससे बेखबर है. वहीं आम लोगों में भी कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है.

गंदगी और दुर्गंध से जीना हुआ दूभर

गंदगी और दुर्गंध से स्थानीय वाशिंदों का जीना दूभर हो गया है. नहर में बढ़ती गंदगी से गर्मी के सीजन में बीमारियों का भय भी बना हुआ है. बाजार की जागरूक जनता ने पंचायत प्रतिनिधि व प्रशासनिक महकमें से नहर की सफाई कराने की मांग की है. यह भी कहा है कि बाजार क्षेत्र अंतर्गत नहर में गंदगी डालने को प्रतिबंधित किया जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति गंदगी नहर में न डाल सके.

कोयल नदी चार वर्ष से बनी है कचरा डंपिंग यार्ड 

जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से सटे चैनपुर के शाहपुर कोयल नदी तट पर पिछले चार वर्षों से कचरा डंप किया जा रहा है. शुरूआत में जमीन नहीं रहने की वजह से मेदिनीनगर नगर निगम (उस समय नगर पर्षद) द्वारा यहां कचरा गिराया गया.

लंबे समय तक यहां कचरा डंप किए जाने के बाद जमीन मिलने पर निगम द्वारा यहां कचरा डंप किया जाना तो बंद कर दिया गया है, लेकिन अन्य लोगों की आदतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

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वार्ड पार्षद और मेयर-डिप्टी का नहीं रहता ध्यान

नगर निगम बनने के बाद भी इस शहर के मुख्य द्वार की विशेष सफाई पर ना तो क्षेत्र के वार्ड पार्षद का और ना ही नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर व कार्यपालक पदाधिकारी का ही ध्यान रह गया है. कभी-कभी पर्व त्योहारों पर जेसीबी लगाकर पूर्व से गिराये गए कचरे को कोयल नदी में डाल दिया जाता है.

सफाई कर पार्क बनाने की घोषणा हवा हवाई

मेदिनीनगर के नगर निगम बनने के बाद तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अजय साव ने इस क्षेत्र की सफाई कर यहां पार्क बनाने की जानकारी दी थी, लेकिन यह भी हवा-हवाई ही साबित हुई. यहां ना तो पार्क बना और ना ही कचरा गिराना बंद हुआ.

यहां कहना गलत नहीं होगा कि केवल मौखिक घोषणा करने से कुछ नहीं होता, उसे जमीनी हकीकत दी जाए तो बेहतर. हर दिन गिरने वाले कचरे में आग लगा दी जाती है. इससे दुर्घटनाओं के साथ-साथ लोगों को बीमारियां भी हो रही हैं.

नाले में तब्दील सतबरवा की लाइफ लाइन मलय नदी

कोयल नदी की तरह सतबरवा की लाइफ लाइन मलय नदी का भी यही हाल हो गया है. मलय नदी कम नाला ज्यादा नजर आने लगी है. इसमें प्रतिबंधित प्लास्टिक के साथ घरों की नालियों का कचरा लगातार गिराया जाता है. नदी के आस-पास संचालित ग्रेफाइट फैक्ट्रियों का डस्ट भी मलय नदी में ही डंप किया जाता है.

इससे नदी के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है. नदी के किनारे निर्माण होने से इसका अतिक्रमण भी किया जा रहा है. इससे नदी संकरी होती जा रही है.

सतबरवा की बड़ी आबादी पर बढ़ा खतरा  

इस नदी पर सतबरवा की बड़ी आबादी निर्भर रहती है. नदी के पानी से जहां लोग खेती करते हैं, वहीं नहाने और कपड़ा धोने का काम भी मलय नदी में ही किया जाता है. नदी के जल से जानवरों की प्यास बुझती है, लेकिन नदी के जो हालात हैं, उससे अब ऐसा संभव होता नहीं दिखता है. नदी का बहाव अप्रैल माह में ही बंद हो गया और अब यह सिर्फ नाला बनकर रह गयी है.

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