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पलामू : सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का धरना

नो हॉर्न जोन में धरने की अनुमति कैसे मिली

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Palamu : मेदिनीनगर सदर अस्पताल में कुव्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस ने सदर अस्पताल परिसर में अपनी 13 सूत्री मांगों के समर्थन में धरना दिया. सदर अस्पताल के नो हॉर्न जोन होते हुए भी कांग्रेस नेताओं ने धरने में डीजे का इस्तेमाल किया, जिससे मरीज और डॉक्टरों का काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा. धरने के कारण गाड़ियों के काफीले पर डॉक्टरों और मरीजों में काफी आक्रोश भी था, लेकिन सोंचने वाली बात यह रही कि आखिर नो हॉर्न जोन में धरने की अनुमति कैसे मिली. वहीं मामले पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने राष्ट्रीय पार्टी की उपेक्षा पर रोना रोया.

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अस्‍पताल में कम निजी क्लिनिक में ज्‍यादा देते हैं समय 

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष बिट्टू पाठक ने की. पाठक ने कहा कि सदर अस्पताल की व्यवस्था काफी लचर हो गयी है. मरीजों को न तो उचित इलाज और न ही उचित दवा उपलब्ध करायी जा रही है. साथ ही अस्पताल में गंदगी का आलम यह है कि मेन गेट पर पहुंचते ही नाक पर रूमाल रखकर लोग अस्पताल के अंदर जाते हैं. उन्होंने कहा कि यहां के चिकित्सक अस्पताल में कम और निजी क्लिनिक में ज्यादा समय देते हैं.

शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्याम नारायण सिंह ने कहा कि जब से बिश्रामपुर के विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी स्वास्थ्य मंत्री बने हैं, तब से पलामू में सदर अस्पताल की हालत दिनों दिन बदतर होती जा रही है. धरना के बाद पलामू के उपायुक्त शांतनु अग्रहरि को 13 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया. धरना को पूर्व सांसद कामेश्वर बैठा, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष पूर्णिमा पांडेय, रामाशीष पांडेय, लक्ष्मी नारायण तिवारी, संतोष चौबे, नशीम हैदर, शमीम अहमद राइन, राजेश चौरसिया, इमरान सिद्धीकी, अजय दुबे, इश्वरी प्रसाद सिंह, सज्जाद खां, नगर अध्यक्ष अभिषेक सिंह, मनोज शुक्ला, विजय तिवारी, सिद्धनाथ प्रसाद गुप्ता, निरंजन यादव ने भी संबोधित किया.

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ऐसे तो चली जायेंगी कई जानें

कांग्रेस ने प्रशिक्षु आइएएस डॉ ताराचंद के उस फैसले पर भी आपत्ति जतायी है, जिसमें उन्होंने डाक्टरों को निर्देश दिया है कि अगर कोई दवा अस्पताल में उपलब्ध न हो तो मरीज के पर्चे पर नॉट एवलेवल (उपलब्ध नहीं है) लिख दें. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सदर अस्पताल में ज्यादातर इमरजेंसी केस आते हैं और ऐसे में डाक्टरों को यह लिखना व्यवहारिक नहीं है. इस परिस्थिति में कई लोगों की जान भी जा सकती है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि या तो सदर अस्पताल में सभी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये,अन्यथा डाक्टरों को इस बंधन से मुक्त रखा जाये. उन्होंने कहा कि अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं रहने की स्थिति में बाहर की दवा लिखना डाक्टरों की मजबूरी है.

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