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पलामू: इप्टा का 76वां स्थापना वर्ष जनसंस्कृति दिवस के रूप में मना, निकला मार्च-सांस्कृतिक आंदोलन और उद्देश्यों पर हुई चर्चा

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Palamu: भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा ने 76 वां स्थापना वर्ष जन संस्कृति दिवस के रूप में मनाया. शनिवार की शाम स्थापना दिवस पर इप्टा की पलामू इकाई ने कार्यक्रम की शुरुआत में सांस्कृतिक मार्च निकालकर मौजूदा दौर जन सांस्कृतिक आंदोलन और उद्देश्य की चर्चा की.

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जिला स्कूल के मैदान में बने नसीम खान रंगभूमि पर कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी और इप्टा के संस्थापक रहे प्रो एमपी विश्वकर्मा ने इप्टा का गौरवशाली ध्वज फहराकर किया.

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प्रेम, अमन व शांति के लिए इप्टा और कलाकारों की जरूरत 

मौके पर उन्होंने कहा कि 25 मई 1943 को इप्टा की स्थापना जनपक्षीय कला के विस्तार और कलाकारों की सामूहिक अभिव्यक्ति के लिए किया गया. तब से लेकर आज तक इप्टा अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के जरिये न सिर्फ संघर्षों का स्वर बना बल्कि शोषित-उत्पीड़ित जनता की आवाज बनकर सबके लिये सुंदर दुनिया बनाने की बात भी की. उन्होंने कहा कि आज इप्टा जैसे मंच और कलाकारों की जरूरत ज्यादा है, ताकि प्रेम, अमन व शांति के साथ मानवीय मूल्य जिंदा रह सके.

मौके पर प्रो के.के मिश्रा, नंदलाल सिंह, केडी सिंह, सुरेश सिंह, इप्टा के महासचिव उपेंद्र मिश्रा, आलोक वर्मा, मिंटू वर्मा, वंदना श्रीवास्तव, शालिनी श्रीवास्तव, विनय शर्मा, शिवशंकर प्रसाद, प्रेम भसीन, नुदरत नवाज समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.

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आखिर कब तक नाटक का मंचन

कार्यक्रम में मासूम आर्ट ग्रुप ने महिला हिंसा पर आधारित सैकत चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक आखिर कब तक प्रस्तुत किया. नाटक में विनोद कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन मुनमुन चक्रवर्ती, मनीषा सिंह, कामरूप प्रसाद सिन्हा, सुजीत कुमार, राज प्रतीक पाल, सुमित कुमार गुलशन, मुकेश विश्वकर्मा, उज्जवल सिन्हा, विकास सिंह, सुमित वर्मन, आसिफ खान व रंजन सर्राफ ने सशक्त अभिनय किया. नाटक के संवाद अदायगी और कहानी की नायिका शव्या, सीता, द्रौपदी व किरण की भूमिका में मुनमुन चक्रवर्ती के अभिनय ने दर्शकों को झकझोरने का काम किया.

अनेकता में एकता नाटक की प्रस्तुति

वहीं नई संस्कृति सोसायटी के कलाकारों ने अनेकता में एकता नाटक प्रस्तुत कर हिंदुस्तान में धर्म व जाति के आधार पर नफरत व हिंसा के खिलाफ महात्मा गांधी के भाईचारगी के संदेश को उजागर किया. नाटक में संस्था के निदेशक अजीत कुमार पाठक के नेतृत्व व मार्गदर्शन में अनिल कुमार चैधरी, पूजा कुमारी, देव प्रकाश गिरी, राजा कुमार व काजल ने अपने अभिनय से खूब वाहवाही बटोरी. इस अवसर पर मासूम के कलाकार राम-श्याम किशोर पाण्डेय व मानस रॉय ने गीत प्रस्तुत किया.

प्रेम प्रकाश के निर्देशन में हुए कार्यक्रम

नसीम खान रंगभूमी पर इप्टा के कलाकारों ने आजादी की दूसरी लड़ाई नाटक के जरिये वर्तमान समय मे छद्म व फर्जी राष्ट्रवाद की आड़ में गायब होते जनता के बुनियादी सवालों की दर्शकों का ध्यान आकृष्ट कराया. नंदलाल सिंह की परिकल्पना को प्रेम प्रकाश ने आजादी की दूसरी लड़ाई नाटक के रूप में नाट्य स्वरूप दिया.

प्रेम प्रकाश के निर्देशन में इप्टा नये कलाकार प्रीतम, प्रतीक, मनीष व आयुष प्रकाश ने सशक्त आंगिक अभिनय के साथ जनता से संवाद स्थापित में सफल रहे. नाटक के अंत मे शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिये आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू करने पर जनता को सोचने की अपील की.

मौके पर ये लोग थे मौजूद

मौके पर पर इप्टा के कलाकारों ने कई जनगीत भी प्रस्तुत किये. हम होंगें कामयाब एक दिन से गीत के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ. कार्यक्रम को सफल बनाने में विकास कुमार पप्पू, रंजीत पाठक, भूपेश शर्मा, प्रेम कुमार, यश प्रकाश, प्रांजल, अजीत ठाकुर, शशि पाण्डेय, दिनेश शर्मा, अभय मिश्रा, विजेता नंद तिवारी आदि ने सहयोग किया.

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