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पलामू: 12 करोड़ की नहर एक बरसात झेल नहीं पायी, कई जगह हुई ध्वस्त

Palamu: झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर में उद्घाटन के 12 घंटे के बाद बही कोनार सिंचाई परियोजना की नहर की तरह ही पलामू जिले में भी एक नहर एक बरसात भी नहीं झेल पायी. जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत बुटनडूभा डैम से निकली नहर (कैनाल) एक बरसात को भी झेल नहीं पायी. 12 करोड़ की लागत से बनी इस नहर परियोजना में नियम विरुद्ध और गुणवता को ताक पर रख कर निर्माण कार्य किया गया. नतीजा एक बारिश में ही नहर कई जगहों पर टूट गयी.

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कई घर पानी में डूबे रहे

पूर्व से बह रहे नाला, आहर और पहाड़ के पानी की ठोस से निकास नहीं की गयी. जैसे-तैसे छोटे-छोटे पाइप देकर नहर बना दी गयी. पिछले दिनों जब तेज बारिश हुई तो पानी निकलने के सारे साधन बंद नजर आये. नाला और आहर का पानी भरते-भरते कैनाल को ओवरफ्लो कर गया. काफी देर रुकने के बाद अचानक कैनाल को तोड़ कर पानी के बहने लगा, तेज बहाव के कारण कैनाल तो कई जगहों पर टूटा ही सारा पानी चांदो गांव में घुस गया. इससे आधा दर्जन घर कई दिनों तक पानी में डूबे रहे.

चांदो गांव में कभी नहीं घुसा पानी

चांदो के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में आज तक बरसात का पानी नहीं घुसा. इस वर्ष नहर बना है. नहर का निर्माण ढंग से नहीं किया गया. बरसात के पानी के निकलने का कोई जगह ही नहीं छोड़ा गया. पिछले दिनों तेज बारिश होने पर अचानक रात में गांव में पानी घुस गया. इससे उनके घर दो से तीन दिनों तक डूबे रहे. उनकी सुधि तक लेने वाला आज तक कोई नहीं आया. कई मकान भी तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गये.

पानी निकालने के लिए हुआ छोटे पाइप का इस्तेमाल

नहर के टूट जाने का प्रमुख कारण पानी निकासी में अनियमितता बरतना है. करोड़ों की लागत से बनी इस योजना में जगह-जगह प्रकृति के अनुसार पानी निकासी का प्रबंध किया जाना था, लेकिन छोटे पाइप देकर कार्य पूरा करा दिया गया. तीन फीट पाइप की जगह डेढ़ फीट पाइप लगाया गया. पाइप का साइज छोटा होने के कारण पानी ठीक से निकल नहीं पाया और नहर को ध्वस्त करते हुए निकल गया. निर्माण कार्य गर्मियों के दिनों में शुरू हुआ. कई महीने तक काम चला. उस समय तो इसका कोई अहसास नहीं हुआ, लेकिन बारिश ने कई जगहों पर इसे नुकसान पहुंचा तो इंजीनियर से लेकर ठेकेदार को भी इसमें कमियां समझ आने लगीं.

800 हेक्टेयर में पानी देने की योजना

बुटनडूभा डैम से निकली बांयी और दांयी नहर से 800 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की योजना है. जिन इलाकों से नहर का पानी बहकर जाता, उस क्षेत्र में प्रकृति को छोड़ कर सिंचाई का कोई दूसरा प्रबंध नहीं है. नतीजा एक करीब दो दर्जन गांवों में सिंचाई को देखते हुए इस योजना को मूर्त रूप दिया गया था.

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अफरशाही के कारण हुई ऐसी घटना: जिला पार्षद

चैनपुर पूर्वी के जिला परिषद सदस्य शैलेन्द्र कुमार ने आरोप लगाया कि नहर के निर्माण में घटिया लामग्री का इस्तेमाल किया गया है. वे कई बार मुखर हुए. मामले को जिला परिषद बोर्ड की बैठक तक में उठाया, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी करते रहे. सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने कभी यह बताने की कोशिश नहीं की कि आखिर यह योजना कितने करोड़ की है. जिला पार्षद ने कहा कि करोड़ों की योजनाएं एक बरसात नहीं झेल पातीं, इससे पता चलता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी मजबूत हैं. कई घर डूबे रहे, लेकिन ग्रामीणों का हाल जानने के लिए आज तक ना तो निर्माण कंपनी का कोई कर्मी ही गया और ना ही अधिकारी. इलाके के मुखिया नंदू सिंह ने भी जिला पार्षद के बयान का समर्थन किया है.

मरम्मत शुरू, बाहर के पानी को स्टेप कर दिया जायेगा: जेई

सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता देवेश कुमार ने बताया कि बाहर के पानी इतना आ जायेगा, इसका अंदाजा बिल्कुल नहीं था. इसके लिए निकासी का प्रबंध किया जा रहा है. मरम्मत शुरू की गयी है. उन्होंने कहा कि बाहर के पानी निकासी का प्लान बना कर भेजा गया है. इससे पहले यह घटना हो गयी.

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