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Palamu : यूक्रेन से लौटा एमबीबीएस का छात्र आसिफ, छोड़ चुका था वापसी की उम्मीद

Palamu : रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच वहां फंसे छात्र-छात्राओं का हर दिन पलामू पहुंचने का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के सुदना में रहनेवाले आसिफ अनवर शुक्रवार को घर वापस लौट आये. यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गये थे. आसिफ अनवर युद्धग्रस्त यूक्रेन से भारत वापसी की उम्मीद छोड़ चुके थे. विपरीत परिस्थितियों में कई बार उन्हें लगा था कि अब घर कभी नहीं पहुंच पायेंगे. यहीं उनकी ज़िंदगी समाप्त हो जायेगी.

यूक्रेन से भारत पहुंचने तक के सफर पर आसिफ बताते हैं कि 24 फरवरी से 1 मार्च तक का अनुभव काफी भयावह था. आसिफ 2 मार्च को दिल्ली पहुंचे. यूक्रेन से रोमानिया में प्रवेश करने तक का सफर शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ कर रख देनेवाला था.

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रोमानिया में जब भारत आने के लिए फ्लाइट में बैठ गये, तब जाकर वापस घर पहुंचने की उम्मीद जगी. युद्ध शुरू होने के दिन से ही खौफ के साये में जीवन बीत रहा था. उनके हॉस्टल में रहनेवालों के लिए न्यूक्लियर बंकर मुहैया कराया गया था.

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रात में सायरन बजा और बंकर में छिपना पड़ता था. कमरे की लाइट जलाना मना था. भारतीय दूतावास द्वारा मुहैया कराये गये फोन नंबर पर कोई जवाब देनेवाला नहीं था.

27 फरवरी को खराब मौसम के बावजूद रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे तो वहां का दृश्य काफी भयावह था. बॉर्डर पार करना किसी मुसीबत और बहादुरी से कम नहीं था. हमेशा बॉर्डर पर भगदड़ की स्थिति बनी रहती थी. ऐसी भीड़ में अगर आप शारीरिक रूप से कमजोर हैं तो केवल पिछड़ ही नहीं जायेंगे, बल्कि पैरों तले कुचले भी जायेंगे.

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कई छात्र-छात्राओं के साथ ऐसा हो चुका था. ऐसी हालात में कागजात गुम जा रहे थे. बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और 28 फरवरी को बॉर्डर पार कर रोमानिया पहुंचे, जबकि उनके साथ बॉर्डर पर पहुंचे दोस्त चार दिन बाद रोमानिया में एंट्री कर पाये.

आसिफ बताते हैं कि रोमानिया में पहुंचने पर सबका ख्याल रखा गया, लेकिन घर लौटनेवाले स्टूडेंट ज्यादा और फ्लाइट में सीट कम है. इस स्थिति में भी छात्रों का मनोबल टूट रहा है.

आसिफ ने बताया कि अब उन्हें आगे की पढ़ाई की चिंता सता रही है. उसका आगे का कोर्स कैसे पूरा होगा, यह चिंतनीय विषय है. आसिफ ने भारत सरकार से इस दिशा में पहले करने की अपील की है. साथ ही अब अपने दोस्तों की सालमती की दुआ मांग रहे हैं.

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