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पलामू : पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी की अपील,भाषाओं को लेकर छात्रों के हक में सीएम करें घोषणा

Palamu : झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने 10 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पलामू दौरे के दौरान पलामू प्रमंडल के युवाओं को भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका भाषाओं परीक्षाओं में जोड़ने की मांग कर एक बार फिर इसकी याद दिलायी है. उन्होंने कहा है कि इस वाजिब मांग को लेकर पलामू के युवाओं का समूह आंदोलित है. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नियुक्ति परीक्षाओं में भाषाओं के आधार पर उनके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने सीएम से पलामू दौरे के दौरान युवाओं को भोजपुरी, हिंदी व मगही और मैथिली-अंगिका भाषाओं के छात्रों के हक में घोषणा करने की अपील की है.

हिंदी-अंग्रेजी भाषा को भी हटा दिया गया

बता दें कि सरकार ने कैबिनेट की बैठक में झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं के लिए कुल 12 क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं को चिन्हित कर स्वीकृति दी गई. इसमें पलामू प्रमंडल के तीन जिलों तथा चतरा जिले में प्रमुखता से उपयोग की जाने वाली क्षेत्रीय भाषा भोजपुरी, हिंदी व मगही को शामिल नहीं किया गया है. भोजपुरी तथा मगही हिंदी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में सम्मिलित नहीं किए जाने से लोगों में काफी रोष है.

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झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में पलामू प्रमंडल के तीनों जिलों तथा चतरा जिले के अभ्यर्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी मगही तथा हिंदी भाषा को शामिल किया जाए.

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ज्ञात हो कि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में झारखंड राज्य से मैट्रिक व इंटर पास छात्र ही शामिल हो सकते हैं. त्रिपाठी ने कहा कि 15 नवंबर 2000 से झारखंड में निवास करनेवाले सभी अभ्यर्थियों को शामिल किया जाय. राज्य के विभिन्न जिलों में भोजपुरी, हिंदी तथा मगही भाषा प्रमुखता से प्रचलन में है.

21 दिसंबर को हाईकोर्ट में होनी है सुनवाई

झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नियुक्ति परीक्षाओं की नई नियमावली पर झारखंड सरकार और आयोग से जवाब मांगा है. कोर्ट ने परीक्षा की नियमावली में राज्य सरकार द्वारा किये गये संशोधनों के बारे में 21 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित है. बता दें कि अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नियमावली में उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए पात्र माना गया है जो राज्य के संस्थान से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा पास करेंगे.

यह नियम सिर्फ सामान्य वर्ग के परीक्षार्थियों के लिए होगा, जबकि आरक्षित श्रेणी के परीक्षार्थियों को इस शर्त से छूट हासिल होगी. याचिका में बताया गया है कि नयी नियमावली में संशोधन कर क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं की श्रेणी से हिंदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया है, जबकि उर्दू, बांग्ला और उड़िया को रखा गया है.

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