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पलामू : तरहसी के दो सौ ग्रामीणों को 10 वर्ष बाद बिजली विभाग ने भेजा 21- 21 हजार का बिल, भड़के लोगों ने पांकी विधायक का घेरा आवास

Palamu : जिले के तरहसी प्रखंड के मंझौली, गुरहा एवं परसांवा के 200 ग्रामीण बिजली विभाग की लापरवाही से इन दिनों परेशान हैं. ग्रामीणों को 10 वर्ष बाद 21-21 हजार का बिजली बिल थमा दिया गया है. बिजली विभाग बिल नहीं जमा करने पर ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है और मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की चेतावनी दी है. इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बिजली विभाग की तानाशाही रवैया के खिलाफ पांकी विधायक के आवास का घेराव किया. मौके पर झारखंड सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और परेशानी का निदान करने की मांग की गई.

 

27 दिसंबर को तरहसी प्रखंड कार्यालय में होगा समझौता शिविर

प्रदर्शन करते हुए विधायक आवास का घेराव कर रहे ग्रामीणों के साथ क्षेत्रीय विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता ने बैठक की और आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं के निदान के लिए 27 दिसंबर को तरहसी प्रखंड कार्यालय परिसर में शिविर लगाया जायेगा. इसमें बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ समझौता कराने की कोशिश की जाएगी. ग्रामीणों की परेशानी को दूर करने के लिए वे पूरी तरह से तत्पर हैं.

 

क्या है मामला

ग्रामीणों के अनुसार 8-10 वर्ष पूर्व गांव में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली पहुंचाने की तैयारी की गई थी. उन्हें 10-10 में बिजली मीटर दिया गया था, लेकिन गांव में बिजली नहीं जली. तार पोल तक नहीं लगे. अचानक एक दशक बाद एक साथ 21 हजार का बिल भेजा गया. जिन लोगों को बिजली बिल थमाया गया है, उनके घरों में इन दिनों टाटा कंपनी का बिजली मीटर लगा है और वे सभी बिजली जलाते हुए नियमित बिल का भुगतान भी कर रहे हैं.

 

गिरफ्तार कर जेल भेजने की धमकी देता है बिजली विभाग

विधायक आवास का घेराव कर रहे श्रीकेदाल के उदय भारती, कमलकेड़िया के उमा भारती, राम देव भारती, कमलेश गिरी आदि ने बताया कि सभी को 21 हजार से अधिक का बिजली बिल थमाया गया है. विभाग बिल का भुगतान नहीं करने पर विभाग गिरफ्तार कर जेल भेजने की धमकी देता है. ग्रामीणों ने कहा कि जिस समय बिजली मीटर दिया गया था, उस समय गांव में बिजली भी नहीं आई थी. ऐसे में जब उन्होंने राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली जलाई ही नहीं तो फिर बिल का भुगतान वे कैसे करेंगे? साथ ही 10 वर्ष बाद अचानक भारी-भरकम बिल देना कहां तक जायज है?

इधर, बिजली विभाग से पक्ष लेने के लिए सहायक अभियंता अरविंद कुमार से उनके मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

 

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