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पलामू : लोकसभा में उठाया गया एशिया प्रसिद्ध कुंदरी लाह बगान का मामला

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Palamu : एशिया में दूसरे स्थान और भारत का पहला कुंदरी लाह बगान का मामला लोकसभा में शुक्रवार को उठाया गया. चतरा के सांसद सुनील कुमार ने लोकसभा में नियम 377 के तहत कुंदरी लाह बगान से जुड़े मामले को उठाया. सांसद ने केंद्र सरकार से मंत्रालय स्तर पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर अध्यन के लिए भेजने, साथ ही कुंदरी लाह बगान के पूर्ण विकास के लिए कुंदरी में लाह प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने की मांग की है.

निर्माण कार्य आदि में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त

सांसद ने कहा कि लोकसभा क्षेत्र के लेस्लीगंज प्रखंड में स्थित कुंदरी लाह बगान में स्थानीय स्तर पर संयुक्त वन प्रबंधन समिति (जेएफएमसी) बनी हुई. परंतु इस समिति की बैठकों में वन विभाग के पदाधिकारी उपस्थित नहीं होते है. जिससे ग्रामीणों की समस्याओं की जानकारी और समाधान नहीं हो पाती है. वन विभाग के पदाधिकारी मनमानी करते हैं और निर्माण कार्य आदि में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हो रही है.

पलाश के पौधों पर लाह के कीड़ों का संचरण किया जाता है

उन्होंने कहा कि इस लाह बगान में पलाश बहुयात में लगाये जाते हैं. इसका व्यवसायिक और आयुर्वेदिक औषधीय निर्माण में उपयोग होता है. पलाश के पौधों पर लाह के कीड़ों का संचरण किया जाता है. इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध होता है. रैयत ग्रामीणों द्वारा दिए गए भूमि और गैरमजरूआ भूमि पर लगे हुए पलाश वृक्षों को संग्रहित कर कुंदरी लाह बगान का निर्माण हुआ था. इसका मकसद था कि ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हो सके.

आजीविका के लिए कहीं और पलायन नहीं करे

उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रिद्धि-सिद्धि प्राथमिक लाह उत्पादक सहयोग समिति बनी है. इसके माध्यम से ग्रामीण आंदोलित हो रहे हैं. ग्रामीणों की सरकार से मांग है कि अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकार की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत सामुदायिक अधिकार पट्टा के अंतर्गत वन संसधन, संवर्धन और प्रबंधन करने का अधिकार पट्टा सुनिश्चित किया जाये, जिससे की ग्रामीणों स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बने और आजीविका के लिए कहीं और पलायन नहीं करे.

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