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पलामू: मलय डैम में लगी जाल में फंसी 30 किलो की मछली, 2600 में बिकी

Palamu: जिले के सतबरवा के मलय डैम से शनिवार को करीब 30 किलो ग्राम की एक बड़ा मछली निकाली गयी. मछली डैम में लगाए गए फांसा जाल में फंसी थी. मछली को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. मुरमा मलय डैम मत्स्य जीवी सहयोग समिति सचिव अरुण सिंह ने बताया कि मछली को 26 सौ रुपए में बेचा गया. मलय डैम मध्यम सिंचाई योजना के रूप में मशहूर है. नीली क्रांति के जरिए मछली पालन का बड़ा केंद्र बनते जा रहा है. मुरमा मलय मत्स्य जीवी सहयोग समिति लिमिटेड के नाम से एक निबंधित संस्था मत्स्य पालक (श्रमिकों) के लिए संगठन बनाया गया है जिसके अध्यक्ष योगेंद्र कुमार सिंह है. इसमें करीब आधा दर्जन भर से गांव के 75 मत्स्यजीवी सदस्य निबंधित हैं.

इनके रोजी-रोजगार के लिए मलय डैम के पानी में मछली पालन के लिए केज कल्चर लगा है। केज कल्चर 90 प्रतिशत अनुदान के तौर पर मत्सय विभाग की ओर से दिया गया है. दर्जनभर केज कल्चर डैम के पानी में लगे हैं जिसमें कई सौ किलोग्राम मछली का जीरा अनुदान पर मिला है उस जीरा को केज कल्चर में डाला जाता है.

मछली बड़ा होने पर उसे बाजारों में बेचकर आर्थिक रूप से सहयोग समिति लिमिटेड के लोग सशक्त हो रहे हैं. डैम से मध्यम सिंचाई योजना के तहत हजारों एकड़ भूमि को सिंचित किया जाता है, जिसमें सतबरवा, मेदिनीनगर, सदर और लेस्लीगंज प्रखंड के कई गांव के खेतों को नहर के जरिए पानी पहुंचता है. मौके पर संदीप कुमार उर्फ बबन प्रसाद रवि प्रसाद ,संजय प्रसाद, शर्मा जी, राजेंद्र राम समेत कई लोग मौजूद थे.

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