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पलामू: 5वें दिन भी आन्दोलन पर डटे रहे एनपीयू के 21 कर्मी, रिटायर विश्वविद्यालय कर्मियों का मिला समर्थन

Palamu : ‘चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा’ इस चैपाई के द्वारा हनुमान जी को शक्तियों को याद दिलाया जाता था- उसी प्रकार विश्वविद्यालय के 21 अस्थाई कर्मियों के द्वारा मांगों को लेकर पांचवें दिन भी कार्य बहिष्कार सह धरना दिया. विश्वविद्यालय प्रशासन को उनमें निहित शक्तियों को याद दिलाया गया. आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी शक्ति को मानने में उदासीन रवैया अपना रहा है.

अस्थाई कर्मियों की हड़ताल के कारण एक सप्ताह से विश्वविद्यालय से छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों का कार्य नहीं हो पा रहा है. आखिर कब तक विश्वविद्यालय की नींव खड़े करने वाले कर्मियों को विश्वविद्यालय प्रशाशन अनदेखी करेगा? कोरोना काल में ऐसे भी सभी कार्यों पर ब्रेक लग गए थे और जब कोरोना में कमी आने से कार्यों में थोड़ी बहुत गति आई तो अब कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार सह धरना विश्वविद्यालय के कार्यों में पूर्णतः ब्रेक लगा दिया है.

शनिवार को ना ही कुलपति और न प्रति कुलपति कार्यालय में उपस्थित थे. जिनसे इस मुद्दे पर उनकी राय ली जा सके. कर्मियों के आन्दोलन का नैतिक समर्थन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, नी.पी. वि. के प्रो अरबिंद कु सिंह, प्रो कामेश्वर सिंह, प्रो सुनील दास, डॉ ब्रिज किशोर मिश्र एवं डॉ दिब्य प्रकाश पांडेय ने धरना स्थल पर पहुंच कर दिया. साथ ही अवकाश प्राप्त शिक्षक सह पूर्व सीसीडीसी डॉ राधा रमन किशोर एवं परीक्षा विभाग कर्मी साकेत कुमार एवं सत्येंद्र मिश्रा भी धरने में शामिल होकर अपना नैतिक समर्थन दिया.

आन्दोलन में अनुप्रास वर्मा, अविनाश कुमार, नवनीत सिंह, सौरव सेन, सचिन कुमार, आदित्य कुमार, राहुल कुमार, मनोज विश्वकर्मा, शंकर राम, मुकेश शर्मा, शशि प्रजापति, शाहनवाज अंसारी, रवि कुमार, ऋषि कुमार, सुनील मांझी, आरके मिश्रा, संजय साव, ऋषिकेश दुबे, मनमोहन पासवान एवं उदय उपाध्याय शामिल थे.

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