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पलामू: साल 2018 में 120 नक्सली गिरफ्तार, 9 सरेंडर, 17 ढेर

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Palamu: पलामू प्रक्षेत्र में पुलिस लगातार नक्सलियों पर दबाव बना रही है. यही कारण है अब तक कई नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है, तो कई गिरफ्तार कर लिये गये हैं. इतना ही नहीं मुठभेड़ में कई नक्सली मार गिराये गये हैं. साल 2018 की बात करें, तो पलामू प्रक्षेत्र में नक्सलियों के विरूद्ध 1234 अभियान चालाये गये. इसका नतीजा यह हुआ कि कुल 120 नक्सली गिरफ्तार किये गये और नौ ने अपने को पुलिस के हवाले कर दिया. 17 नक्सली पुलिस मुठभेड़ में मारे भी गये.

जिले का सीमा पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण

पुलिस का दावा है कि पलामू जिले में नक्सलियों का स्वच्छंद विचरण बिल्कुल खत्म हो गया है. हालांकि लातेहार, गढ़वा और लोहरदगा की सीमा से सटे क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियां पुलिस के लिए अब भी चुनौती है. पलामू प्रक्षेत्र के डीआईजी विपुल शुक्ला ने बताया कि पुलिस की लगातार कार्रवाइयों की वजह से नक्सलवाद के बदलते परिदृश्य में लातेहार, गढ़वा और लोहरदगा सीमा पुलिस के लिए अब भी चुनौतीपूर्ण है. इस लिहाज से देखा जाये तो नक्सलियों ने अब भी दो पुलिस रेंज यानि पलामू और रांची के अलावा चार जिलों को उलझा रखा है. डीआईजी ने बताया कि पुलिस का मनोबल ऊंचा है और नक्सलियों को किसी भी मोर्चें पर मुहंतोड़ जवाब देने को तैयार है.

11 पिकेट की हुई स्थापना

उन्होंने कहा कि साल 2018 में पलामू रेंज के सुदूर इलाकों मे कुल 11 पिकेट की स्थापना की गयी है. इस वजह से नक्सलियों के विचरण पर रोक लगी है. लातेहार में दो और पिकेट की स्थापना का प्रस्ताव है, जिनके बन जाने से बाकी क्षेत्रों में भी नक्सलियों पर अंकुश लग जायेगा. डीआइजी गुरूवार को अपने कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर बीते साल का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रहे थे.

पिकेट को जनोपयोगी बनाने की पहल

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डीएसपी ने मृतक की पत्नी से घटना की पूरी जानकारी ली. साथ ही ग्रामीण संजय प्रजापति, संतोष यादव, रामचन्द्र प्रजापति का भी बयान दर्ज किया.

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डीआईजी ने बताया कि पलामू प्रक्षेत्र में जितने भी पिकेट की स्थापना की गयी है, सभी को और अधिक जनोपयोगी बनाने की पहल की जा रही है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए पिकेट में भी आवेदन दे सकते हैं. इसके लिए मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है. ग्रामीणों से प्राप्त आवेदनों को अनुशसित कर संबंधित प्रखंड कार्यालय तक पहुंचाने की जिम्मेवारी पुलिस की होगी. इससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी. डीआइजी ने कहा कि पिकेट को इंटीग्रेटेड सेंटर का स्वरूप प्रदान करने की कोशिश चल रही है.

नक्सलियों से संबंधित 86 कांड प्रतिवेदन

विपुल शुक्ला ने बताया कि बीते साल नक्सलियों से संबंधित 86 कांड प्रतिवेदन किये गये. इनमें 33 कांडों में पुलिस को सफलता मिली, जबकि नक्सलियों ने 52 घटनाओं को अंजाम दिया. उन्होंने दावा किया कि अधिकत्तर कांडों का उद्भेदन कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि पिछले साल नक्सलियों से 114 आग्नेयास्त्र और 8159 कारतूस बरामद किये गये.

1641 अपराधी भी गिरफ्तार

साल 2018 में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1641 अपराधियों को भी गिरफ्तार किया गया. इन अपराधियों के पास से 247 हथियार और 1435 कारतूस बरामद किये गये. इस दौरान 1275 कुर्की और 9322 वारंट का निष्पादन किया गया. पुलिस ने इस दौरान 149 गाड़ियां भी बरामद की.

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