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पलामू: 11 साल का हुआ नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, अब भी बुनियादी सुविधाओं का है अभाव  

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Palamu: नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय आज 11 वर्ष का हो गया. एनपीयू के प्रशासनिक कार्यालय में शुक्रवार को एक सादे समारोह के दौरान स्थापना दिवस समारोह मनाया गया. कुलपति सहित अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों ने नीलाम्बर पीताम्बर की तस्वीर के सामने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया.

इस दौरान विश्वविद्यालय में सेवा देने वाले 13 पदाधिकारियों को जहां शॉल देकर सम्मानित किया गया, वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले एनसीसी और एनएसएस ऑफिसर सहित अन्य को स्मृति चिन्ह देकर उनका हौसला बढ़ाया गया.

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तमाम मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ रहा एनपीयू: कुलपति

मौके पर कुलपति डा. एसएन सिंह ने कहा कि एनपीयू 12वें वर्ष में प्रवेश कर गया है. तमाम मुश्किलों के बावजूद यह विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है. 2017 में उन्होंने योगदान दिया था. तब से हर क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की कोशिश की जा रही है. ये सभी के सहयोग से ही संभव हो पा रहा है.

साथ ही कहा कि पलामू के छात्र-छात्राएं काफी प्रतिभावान हैं. यहां से निकले विद्यार्थी आज देश के कई क्षेत्रों में बड़े पदों को सुशोभित कर रहे हैं. विश्वविद्यालय की ओर से जो भी रिक्विजिशन की जरूरत रही है. हमने हमेशा सरकार व झारखंड लोक सेवा आयोग को भेजने का काम किया है, लेकिन लगातार प्रयास के बाद भी अभी तक कॉलेजों को शिक्षक नहीं मिल पाये हैं.

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8 नए सरकारी कॉलेज खोलने की स्वीकृति

कुलपति ने कहा कि इस दौरान एनपीयू में 8 नए सरकारी कॉलेज खोलने की स्वीकृति मिली है. इसके साथ ही लंबे दिनों के प्रयास के बाद प्रशासनिक भवन को मूर्त रूप देने में सफल हो पाये हैं. अगले वर्ष विश्वविद्यालय को अपना प्रशासनिक भवन मिलेगा.

पलामू: 11 साल का नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, अब भी बुनियादी सुविधाओं का है अभाव  
नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय

इसके साथ ही विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में वर्चुअल क्लासेस भी शुरू किए जा सकेंगे. हमने शिक्षकों के प्रमोशन की बातों को आगे बढ़ाया है. वीसी डा. सिंह के सकारात्मक पहल से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम हुए हैं.

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बुनियादी समस्याओं से उबर नहीं पाया है एनपीयू

एनपीयू का आज भले ही 11वां स्थापना दिवस मनाया गया. लेकिन आज भी इस विश्वविद्यालय और इसके अंगीभूत महाविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. बेहतर शैक्षणिक वातावरण का निर्माण अथवा छात्रों को कॉलेज कैंपस से जोड़ने का प्रयास लगातार चल रहा है. लेकिन इसमें अबतक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी है.

शिक्षकों की है भारी कमी

यूजी और पीजी के 10 सेमेस्टर के लिए शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं. विश्वविद्यालय के लिए सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी है. फिलहाल एनपीयू में 21 विषय में पीजी की पढ़ाई कराई जाती है. विभागों और कॉलेजों की बात करें तो महिला कॉलेज को छोड़कर तीन अन्य अंगीभूत कॉलेजों का नैक मूल्यांकन भी नहीं कराया जा सका है.

एनपीयू में एसोसिएट प्रोफेसर गिनती के ही रहे हैं. ऐसी स्थिति में अगले वर्ष एआर, एफए व डीएसडब्ल्यू के साथ कुलपति का भी टर्म पूरा होने वाला है. ऐसी परिस्थिति में शैक्षणिक व प्रशासनिक स्थिति और कमजोर होगी.

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