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पलामू: समाज कल्याण में 11 करोड़ का घोटाला, तत्कालीन डीएसडब्लू, हरिहरगंज-विश्रामपुर सीडीपीओ सहित चार पर प्राथमिकी

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Medininagar: जिला समाजिक सुरक्षा कोषांग के पदाधिकारी सह प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शत्रुंजय कुमार ने पलामू जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहर मद में 11 करोड़ रूपये की वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोप में चार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया है. इनमें तत्कालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कुमारी रंजना, हरिहरगंज बाल विकास परियोजना पदाधिकारी संचिता भगत, विश्रामपुर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सुधा सिन्हा और जिला नाजीर सतीश उरांव के नाम शामिल हैं. जिनपर प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.

इन धाराओं के तहत दर्ज हुई प्राथमिकी

दर्ज प्राथमिकी के आलोक में सभी दोषियों पर धारा 406, 409, 420 व 120 बी के तहत शहर थाना में मामला दर्ज किया गया है. श्री कुमार ने दर्ज प्राथमिकी में कहा है कि जिला समाज कल्याण कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एंव वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए उपायुक्त पलामू द्वारा गठित जांच दल द्वारा पोषाहार मद में सरकार से प्राप्त राशि के व्यय में बड़े पैमाने पर गबन और वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया है.

74 दुकानों में खातांरित कर सरकारी राशि का गबन

जांच दल ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि पूरे जिले में 2595 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 74 दुकानों में पोषाहर की लगभग 11 करोड़ रूपये की राशि खातांरित कर सरकारी राशि का गबन किया गया है. इस मामले में पूरक पोषाहार संचिका 2017-18 के टि.पृ.स 27 पर उपायुक्त पलामू ने 13.2.18 को स्पष्ट आदेश दिया है कि आवंटनादेश के पारा 12 और 14 के आलोक में निर्देश दिया है कि जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अपने निजी खाते में सरकारी राशि नहीं रख सकते है. पोषाहार मद की राशि की निकासी माता समिति की अध्यक्ष और सेविका के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी. संचिका में उपायुक्त के स्पष्ट आदेश के बाद भी त्तकालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कुमारी रंजना ने पोषाहर मद की राशि छद्म दुकानादारों को हस्तांतरित कर दी.

रैंडम सैंपल के तौर पर दो परियोजना की जांच की गयी

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पोषाहर मद में वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए रैंडम के तौर पर जिले के हरिहरगंज और विश्रामपुर की दुकानों की भौतिक जांच, जांच दल की टीम द्वारा की गयी. जांच के क्रम में साक्ष्य मिला कि दुकानदारों द्वारा 10 से 20 प्रतिशत कमीशन की राशि काटकर सेविकाओं को भुगतान किया गया है. यह कटौती तत्कालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कुमार रंजना, हरिहरंगज की तत्कालीनल बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और विश्रामपुर की बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को रिश्वत के उद्देश्‍य से की गयी थी.

साथ ही फर्जी दुकानदारों को भुगतान के लिए नियमविरूद्ध विपत्र बनाने का कार्य तत्कालीन नाजिर द्वारा किया गया था. जांच दल ने वित्तीय अनियमितता के लिए नाजिर सतीश कुमार उरांव को भी दोषी ठहराया है.

कार्यालय से संचिका गायब, प्राथमिकी दर्ज

प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शत्रुंजय कुमार ने तत्कालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कुमारी रंजना और जिला नाजिर सतीश कुमार उरांव पर कार्यालय से संचिका गायब करने की प्राथमिकी भी दर्ज करायी है. उन्होंने दर्ज प्राथमिकी में कहा कि जिला समाज कार्यालय में पोषाहार मद में वित्तीय अनियमितता की जांच के बाद जान बूझकर षडयंत्र के तहत जिला समाज कार्यालय से संचिका को गायब कर दिया गया है. संचिका गायब होने में पदाधिकारी और कर्मचारी की संलिप्तता उजागर स्पष्ट तौर पर उजागर होती है.

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