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जिस SP को नक्सलियों ने दी जान से मारने की धमकी, उसने नहीं दिया मैगजीन हाउस के लिए NOC तो DC ने कर दी गृह सचिव से शिकायत

सब कुछ ठीक नहीं चल रहा जिले के दो आलाधिकारियों के बीच

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Pakur/Ranchi: पाकुड़ में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पाकुड़ डीसी दिलीप कुमार झा एसपी शैलेंद्र कुमार बर्णवाल से नाखुश हैं. एसपी पाकुड़ को कई तरह से कागजों में घेरने की कोशिश हो रही है. यहां तक की पाकुड़ डीसी ने एसपी के खिलाफ गृह विभाग को शिकायत भी की है. पाकुड़ डीसी दिलीप कुमार झा एसपी पर आरोप लगा रहे हैं कि एसपी जिले में उद्योगों को बढ़ावा देने में आनाकानी कर रहे हैं. जो जिला के विकास के लिए ठीक नहीं है. पाकुड़ एसपी और डीसी को लेकर ब्यूरोक्रेसी में खूब बातें बनायी जा रही हैं. पाकुड़ का लोकल मीडिया भी कह रहा है कि डीसी निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए काफी आतुर दिख रहे हैं. इस जल्दबाजी की वजह लोगों को समझ नहीं आ रही है.

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डीसी ने की एसपी की शिकायत

पाकुड़ जिले में WBPDCL कंपनी को अमड़ापाड़ा के पचुवाड़ा में कोल माइन्स का काम मिला हुआ है. जिसके उत्खनन और परिवहन के लिए बीजीआर कंपनी को ठेका दिया गया है. (यह वही बीजीआर कंपनी है जिसके एमडी रघुराम रेड्डी हैं. जिन्हें फिलवक्त आम्रपाली-मगध और पिपरवार में टीपीसी की मदद से अवैध वसूली के मामले में हिरासत में लिया गया है. यह मामला हर महीने करोड़ों रुपए की अवैध वसूली का है.) डीसी दिलीप कुमार झा ने गृह सचिव को लिखे शिकायत पत्र में कहा है कि जिला प्रशासन की तरफ से मैगजीन हाउस खोलने के लिए एसपी को तीन बार एनओसी के लिए लिखा गया है. तीसरी बार लिखे जाने के बाद एसपी ने अपने जवाब में कहा कि जिस जगह मैगजीन हाउस को खोलने के लिए अनुमति मांगी गयी है, वो इलाका नक्सली गतिविधिवाला है. इसलिए एनओसी नहीं दी जा सकती है. पाकुड़ डीसी दिलीप कुमार झा ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि एसपी पाकुड़ संभावित उग्रवादी घटना का हवाला देकर विस्फोटक मैगजीन हाउस की स्थापना के लिए सहमति नहीं दे रहे हैं. इससे कोल परियोजना के संचालन में बड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है. जबकि सीएम ने राज्य स्तरीय बैठक में साफ कहा है कि बंद पड़ी कोल परियोजनाओं को शुरू किया जाए. एसपी पाकुड़ का ऐसा व्यवहार यह साबित करता है कि एसपी जिला में बंद पड़ी कोल परियोजनाओं के लिए गंभीर नहीं हैं.

डीसी ने लिखा पाकुड़ हो गया है नक्सल मुक्त

डीसी पाकुड़ ने जो चिट्ठी गृह विभाग के सचिव को लिखी है. उसमें इस बात का साफ उल्लेख है कि पाकुड़ नक्सल मुक्त जिला हो गया है. जबकि राज्य या केंद्र की तरफ से कभी ऐसा निर्देश नहीं आया है. पाकुड़ को एसआरई जिला की श्रेणी से बाहर किया गया है. गौर करने वाली बात यह है कि अगर पाकुड़ नक्सल मुक्त जिला हो गया रहता तो आने वाले 16-17 अक्टूबर को नक्सलियों के बंद के दौरान पाकुड़ को हाई अलर्ट पर नहीं रखा जाता. सबसे अहम बात यह कि अगर पाकुड़ नक्सल मुक्त जिला होता तो वहां एसएसबी क्या कर रही है. जिस जगह पाकुड़ जिले में मनैगजीन हाउस बनाने की बात हो रही है वो जगह चिलगो है. चिलगो इलाका पूरी तरह से जंगल से घिरा है. ऐसे में वहां नक्सलियों का खतरा हर वक्त बना रहता है.

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क्या था पुलिस की रिपोर्ट में

एसपी पाकुड़ ने मैगजीन हाउस के लिए इंस्पेक्टर रेंज के अधिकारी से जांच करायी. जांच में कहा गया कि जिस जगह मैगजीन हाउस खोलने के लिए अनुमति मांगी जा रही है, वहां की भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से चिलगो मौजा में विस्फोटक के भंडारण के लिए मैगजीन हाउस की स्थापना करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. क्योंकि यह क्षेत्र पूर्ण रूप से उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है. इस क्षेत्र में हमेशा नक्सलियों की गतिविधि बनी रहती है. इस जगह के आसपास के क्षेत्र में पहले भी नक्सली घटना घट चुकी है. जिसमें उग्रवादियों ने पैनम कोल माइन्स के डंपरों को जला दिया था. पैनम कोल माइन्स यहां पहले से था. कंपनी विस्फोटक का भंडारण आलूबेड़ा मैगजीन हाउस में करती थी. पैनम के वक्त यहां किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं घटी. अगर कंपनी का कोई प्रतिनिधि थाना में उपस्थित होता है, तो उनके साथ चल कर सुरक्षित स्थान पर मैगजीन के लिए विचार-विमर्श किया जा सकता है.

एसपी को जान से मारने की मिल चुकी है धमकी

दो जुलाई 2013 को पाकुड़ के एसपी अमरजीत बलिहार की हत्या नक्सलियों ने घात लगा कर की थी. इसके बाद पाकुड़ में कई नक्सली ऑपरेशन हुए. हाल ही में एक ऑडियो वायरल हुआ है. जिसमें नक्सलियों की बात-चीत कैद है. नक्सली पाकुड़ एसपी शैलेंद्र कुमार बर्णवाल के बारे में बात कर रहे हैं. नक्सली संथाली भाषा में बात कर रहे हैं. वो कह रहे हैं कि “यह एसपी पाकुड़ जिला को खाली कर दिया है. जिनको पकड़ा है उनका बेल जल्दी नहीं होने देगा. एसपी को दिल्ली से बैठाया गया है. पाकुड़ जिला को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है यह एसपी. एसपी मारा जाएगा. यहां नहीं तो किसी दूसरे जगह मारा जाएगा.”
इसके अलावा जिले में कई ईनामी नक्सली की मौजूदगी की जानकारी खुफिया विभाग को है. सरकार ने पाकुड़ में कई नक्सलियों पर ईनाम की घोषणा की है. इनमें ताला दा, विजय दा, कार्तिक दा के नाम शामिल हैं. ताला दा पर 10 लाख के ईनाम की घोषणा पुलिस ने की है. वहीं 25 लाख के और दो ईनामी हैं. साथ ही पांच-पांच लाख के कई ईनामी नक्सली जिले में हैं.

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