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पाकिस्ता‍न के ज्ञान चक्षु खुले… चाणक्य–पाणिनी पाकिस्तान के बेटे… तक्षशिला विश्वविद्यालय प्राचीन पाकिस्ता‍न का हिस्सा…

खोखर ने पाणिनि और चाणक्‍य दोनों को प्राचीन पाकिस्‍तान के बेटे बताया. तक्षशिला विश्‍वविद्यालय को प्राचीन पाकिस्‍तान का हिस्‍सा बताये जाने पर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गयी है

 NewDelhi/Islamabad :  पाकिस्‍तान अब पूरी दुनिया में नया ज्ञान बांट रहा है. बता दें कि वियतनाम में पाकिस्‍तान के कथित राजदूत कमर अब्बास खोखर ने प्राचीन भारत की धरोहर तक्षशिला विश्‍वविद्यालय को सोशल मीडिया पर प्राचीन पाकिस्‍तान करार दिया है.

जान लें कि पाकिस्‍तान का अस्तित्‍व ही 14-15 अगस्‍त 1947 को आया था. इससे पहले कोई पाकिस्‍तान था ही नहीं. इसका मतलब भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां चलानेवाला पाकिस्‍तान अब झूठी सूचनाओं के जरिए भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास को धुमिल करने में जुट गया है.

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अब्बास खोखर ने तक्षशिला विश्‍वविद्यालय की तस्‍वीर  ट्वीट की

Sanjeevani

अब्बास खोखर ने तक्षशिला विश्‍वविद्यालय की तस्‍वीर  ट्वीट की है कि तक्षशिला विश्‍वविद्यालय की यह हवाई तस्‍वीर है जो फिर से बनाई गयी है. कहा कि यह यूनिवर्सिटी प्राचीन पाकिस्‍तान में आज से 2700 साल पहले इस्‍लामाबाद के पास मौजूद थी. इस विश्‍वविद्यालय में दुनिया के 16 देशों के छात्र 64 विभिन्‍न विषयों में उच्‍चशिक्षा ग्रहण करते थे जिन्‍हें पाणिनी जैसे विद्वान पढ़ाते थे.

खोखर  ने पाणिनि और चाणक्‍य दोनों को प्राचीन पाकिस्‍तान के बेटे बताया. तक्षशिला विश्‍वविद्यालय को प्राचीन पाकिस्‍तान’ का हिस्‍सा बताये जाने पर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गयी है.

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तक्षशिला विश्‍वविद्यालय में पाणिनी और चाणक्‍य जैसे विद्वान पढ़ाते थे

तक्षशिला विश्‍वविद्यालय में पाणिनी और चाणक्‍य जैसे विद्वान पढ़ाते थे. चाणक्‍य भारतीय उपमहाद्वीप के राजा चंद्रगुप्‍त मौर्य के मंत्री थे और उनके साम्राज्‍य की राजधानी पाटलिपुत्र (पटना) थी. पाकिस्‍तानी राजनयिक इतिहास पर झूठ को फैलाने पर यहीं नहीं रूके.  उन्‍होंने कहा, ‘दुनिया के पहले भाषाविद पाणिनि और दुनियाभर में बहुचर्चित राजनीतिक दार्शनिक चाणक्‍य दोनों ही प्राचीन पाकिस्‍तान के बेटे थे.

बता दें कि पाकिस्‍तान में हमेशा से ही भारतीय उपमहाद्वीप का झूठा इतिहास स्‍कूलों में पढ़ाया जाता रहा है.  पाकिस्तान में इतिहास की किताबों में एक बहुत बड़ा झूठ पढ़ाया जा रहा है.  छात्रों को बताया जा रहा है कि हिंदू-मुसलमान के मूल मान्यताओं में बड़ा विरोध है जिसकी वजह से भारत-पाक का बंटवारा हुआ, वहीं इस तरह के कोई साक्ष्य इतिहास में नहीं पाये जाते.

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सत्ता वर्ग को खुश करने के लिए ऐतिहासिक तथ्यों के सा‌थ छेड़छाड़

पाकिस्‍तान में इतिहास लिखने में की गई सबसे बड़ी गलतियों में से एक है सत्ता वर्ग को खुश करने के लिए ऐतिहासिक तथ्यों के सा‌थ हुई छेड़-छाड़.  ये काम पाकिस्तान में लगातार जारी रहा चाहे वहां सैनिक शासन हो या सिविल.  इस तरह की गलती उन स्‍थानीय स्कूल बोर्ड के द्वारा की गयी जो बच्चों के लिए सेलेबेस निर्माण करने का काम करते हैं. हालांकि बच्चों के टेक्स्ट बुक में इस तरह का खिलवाड़ दोनों की देशों में किया गया है.

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