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पाकिस्तान : 25 जुलाई को चुनाव, सेना ने मीडिया हाउसों पर शिकंजा कसा, थोपी सेंसरशिप

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Islamabad  :  पाकिस्तान  में 25 जुलाई को आम चुनाव होनें  हैं. खबर  है  कि  पाकिस्तानी सेना  मीडिया को  निशाना बना रही है.  मीडिया कवरेज पर बंदिशें लगायी जा  रही  है.  जैसी कि जानकारी  आ रही  है , एक तरह से  सेंसरशिप शुरू कर  दी  गयी  है .  बता दें कि  पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिन्हें पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है.  पाकिस्तान के सबसे बड़ी टीवी चैनल जियो टीवी का प्रसारण इस साल कई सप्‍़ताह  तक ऑफ एयर रहा था.  मीडिया रिपोर्ट  के अनुसार  सेना से डील हो जाने के बाद ही  जियो  का प्रसारण टीवी स्क्रीनों पर  ऑन एयर हुआ. बताया जाता है कि जियो ने सेना के अनुसार अपनी कवरेज में बदलाव करने की  बात मानी थी.  पाकिस्तानी फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष अफजल बट के अनुसार  जैसी  सेंसरशिप   थोपी जा रही है, वैसी हमने कभी नहीं देखी.  वर्तमान में  पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) सत्ता में है. नवाज शरीफ को हटाये जाने के बाद शाहिद खाकान अब्बासी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने  हैं . 1988 में स्थापित पार्टी का चुनाव निशान शेर है. 342 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में पार्टी के 188 सदस्य है.

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पत्रकारों पर दबाव है कि  नवाज शरीफ और उनकी पार्टी  के समर्थन में कवरेज न  किया जाये

पाकिस्तान के सबसे पुराने अखबार  डॉन ने मई में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का इंटरव्यू  प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुंबई में 2008 में आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी सेना का हाथ था,  जिनमें 166 लोग मारे गये थे.  अब डॉन की शिकायत है कि सरकारी एजेंसियां उसके हॉकरों को लगातार परेशान कर रही हैं. द न्यूज अखबार के संवाददाता वसीम अब्बासी के अनुसार  पाकिस्तान के दो सबसे ताकतवर मीडिया हाउसों पर इतना दबाव है तो फिर छोटे मीडिया हाउसों के बारे में तो कोई संभावना ही नहीं बचती. इसलिए जो कहा जायेगा, वही करेंगे.  एक राजनयिक सूत्र  के अनुसार  पाकिस्तान में एक सोची समझी योजना के जरिए मीडिया का मुंह बंद करने की कोशिश की  जा  रही है. यह चिंता की बात है. बता दें  कि   पाकिस्तान के लिए यूरोपीय संघ के मुख्य चुनाव पर्यवेक्षक मिषाएल गाहलर ने डॉयचे वेले से खास बातचीत में कहा है कि वे पाकिस्तानी मीडिया पर भी नजदीकी नजर रख रहे हैं.वसीम अब्बासी  कहते हैं कि पत्रकारों पर दबाव डाला जा रहा है कि वे नवाज शरीफ और उनकी पार्टी पीएमएल (एन) के समर्थन में कोई कवरेज ना करें.

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 पाकिस्तान में सेना पर सवाल उठाना आसान नहीं 

नवाज शरीफ लगातार सेना पर देश की राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगा रहे हैं. पाकिस्तान में सेना पर सवाल उठाना आसान नहीं है, खासकर पड़ोसी भारत और अफगानिस्तान के बारे में उसकी नीति पर बात करना एक टैबू है. इसीलिए डॉन को दिये इंटरव्यू में नवाज शरीफ ने एक तरह से ततैये के छत्ते में हाथ डाला है. कई लोग चुनावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा रहे हैं. कुछ पत्रकार कहते हैं कि सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई एक खामोश तख्तापलट कर रही है. सेना पर आरोप लग रहे हैं कि वह किसी भी तरह पीएमएल (एन) को सत्ता से बाहर देखना चाहती है. पाकिस्तान के एक थिंकटैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ लेजिस्लेटिव डिवेलपमेंट एंड ट्रांसपेरेंसी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पक्षपाती लग रही है. 25 जुलाई को होने वाले चुनाव में पीएमएल (एन) के अलावा क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी तहरीक ए इंसाफ और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी मुकाबले में है जिसका नेतृत्व अब उनके बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी कर रहे हैं.

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