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2009 में भी पाकिस्तान ने आतंकी हमला करा लोकसभा चुनाव बाधित करने का प्रयास किया था : रिपोर्ट

अमेरिकी सरकार के एक सीक्रेट संदेश से इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने 2009 में भी आतंकी हमले कराकर आम चुनाव में बाधा डालने की कोशिश की थी.

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NewDelhi :  अमेरिकी सरकार के एक सीक्रेट संदेश से इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने 2009 में भी आतंकी हमले कराकर आम चुनाव में बाधा डालने की कोशिश की थी. उस समय नियंत्रण रेखा के जरिये बड़ी संख्या में जैश और लश्कर के आतंकियों ने घुसपैठ की थी. कूटनीतिक सूत्रों को यह आशंका है कि इस साल आम चुनाव से पहले भी वैसी ही घटनाएं सामने आ सकती हैं. पुलवामा हमले को उसी रूप में देखा जा रहा है.  कहा  जा रहा है कि इस हमले में पाकिस्तान के आईएसआई की छाप साफ नजर आ रही है. इसका मतलब पाकिस्तान भारत में हमले कराकर चुनाव पूर्व देश को बांटने की कोशिश कर रहा है. बता दें कि इसी तरह के षड्यंत्र का खुलासा तब हुआ था जब तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायण सहित शीर्ष भारतीय नेतृत्व ने अप्रैल 2009 में चुनाव से एक सप्ताह पूर्व अमेरिकी अधिकारियों को ब्रीफ किया था कि आतंकियों के घुसपैठ करने की घटना में आश्चर्यजनक तरीके से वृद्धि हुई है और यह बिल्कुल नहीं माना नहीं जा सकता कि इसमें पाकिस्तान सरकार का हाथ नहीं है.

अगस्त 2011 में लीक हुए यूएस संदेश के अनुसार नारायणन और मेनन ने आशंका जताई थी कि अगला आम चुनाव घुसपैठ में हो रही वृद्धि के कारण प्रभावित हो सकता है. आशंका थी कि आतंकी गतिविधियों के कारण चुनाव के आयोजन और संभवतः इसके परिणाम पर भी असर हो सकता है और भारत सरकार पर बड़ी कार्रवाई करने के लिए नया दबाव पड़ सकता है.

रिचर्ड हॉलब्रुक और एडमिरल माइक मुलेन के बीच बैठक हुई थी

खबरेां के अनुसार उस समय सीनियर भारतीय अधिकारियों और अफगानिस्तान व पाकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि रिचर्ड हॉलब्रुक और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन के बीच आठ अप्रैल को बैठक हुई थी. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव डालने में कामयाब हो पाया था या नहीं लेकिन 2009 से पहले किसी तरह की आतंकी घटनाएं सामने नहीं आयीं. रिपोर्ट के अनुसार घुसपैठियों की संख्या को देखते हुए भारत के लिए अकल्पनीय था कि यह पाकिस्तान सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा. भारत को बड़ी आतंकी घटनाओं की आशंकाएं थीं. अमेरिकी अधिकारियों के साथ साझा पेपर के अनुसार 2008 में घुसपैठ की कुल 57 घटनाएं सामने आयी थीं, जबकि 2009 के पहले चार महीने में 94 आतंकी घाटी होते हुए देश में प्रवेश कर गये थे और हिज्बुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के घुसपैठियों को भारत में घुसाया जा रहा था.  रिपोर्ट में कहा गया कि जीपीएस, मैप और कम्पस के इस्तेमाल से यह संकेत मिलते हैं कि इन आतंकियों को उम्दा ट्रेनिंग दी गयी थी.

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