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पाकुड़ः एक तरफ फूंका डीसी का पुतला, दूसरी तरफ लोगों ने कहा, हमारा डीसी कैसा हो- दिलीप झा जैसा हो

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Pakur/Ranchi: आखिर पाकुड़ में हो क्या रहा है? यह सवाल दूसरे जिलों के लोग कर रहे हैं. ऐसा झारखंड की जनता पहली बार देख रही होगी कि पाकुड़ में किसी डीसी के खिलाफ और विरोध में जनता सड़क पर उतर रही है. एक तरफ डीसी का पुतला फूंका जा रहा है तो दूसरी तरफ बिना किसी बैनर तले लोग होर्डिंग्स लेकर सड़क पर उतर रहे हैं. उनकी तख्तियों पर डीसी जिंदाबाद और कई तरह के नारे लिखे हुए हैं. पाकुड़ में मंगलवार को दिन भर ऐसा ही होता देखा गया. इससे पहले भी पाकुड़ में राजननीतिक पार्टियां डीसी पाकुड़ दिलीप कुमार झा के खिलाफ पोस्टरबाजी कर चुके हैं. मामले में आजसू के खिलाफ सरकारी संपत्ति नष्ट करने को लेकर एफआइआर हो चुका है. वहीं पोस्टरबाजी की खबर को प्रकाशित करने वाले मीडिया हाउसों को भी डीसी पाकुड़ की तरफ से लीगल नोटिस भेजा गया.

 धारा 144 के बावजूद आजसू ने फूंका डीसी का पुतला

अपने तय कार्यक्रम के तहत आजसू ने पाकुड़ में आक्रोश रैली निकाली. गोकुलपुर आम बागीचा से रैली शुरू हुई और पूरे शहर का एक चक्कर लगाने के बाद गोकुलपुर आम बागीचा के पहुंची. रैली में करीब 300 लोगों ने हिस्सा लिया. आजसू का बैनर लिए बाइक से सभी कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली. आम बागीचा के पास ही डीसी पाकुड़ दिलीप कुमार झा का पुतला फूंका गया. गौर करनेवाली बात यह है कि एसडीएम पाकुड़ की तरफ से रैली के मद्देनजर धारा 144 लगा दिया गया था. धारा 144 लगने के बावजूद आजसू ने यह रैली निकाली और डीसी का पुतला फूंका. इस मौके पर जिलाध्यक्ष आलोक जॉय पॉल ने कहा कि आजसू के आंदोलन से डीसी डर चुके हैं.  इसलिए धारा 144 पूरे नगर थाना क्षेत्र में लगा दिया गया. यह लोकतंत्र है कोई राजतंत्र नहीं जो अधिकारी मनमानी करते रहेंगे. डीसी के काम से सरकार की छवि खराब हो रही और जनता में आक्रोश बढ़ रहा है. इधर, जनाक्रोश रैली को रोकने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी, सदर बीडीओ दल-बल के साथ मौजूद थे.

डीसी के पक्ष में भी निकली रैली

दूसरी तरफ बिना किसी बैनर के डीसी के पक्ष में कई लोग सड़क पर उतरे. बताया जा रहा है कि इस भीड़ के पीछे सत्ताधारी बीजेपी का हाथ है. करीब 100 की संख्या में ऑटो से डीसी ऑफिस पहुंचे. वहां से सभी सदर ब्लॉक पहुंचे. रैली की शक्ल में सभी डीसी आवास होते हुए बड़ी अली गंज की ओर चले गए. डीसी के पक्ष में जो लोग सड़क पर उतरे थे. उनमें से कइयों के पास तख्तियां थीं. तख्ती पर लिखा था कि डीसी तुम मत घबराना पाकुड़ की जनता तेरे साथ है. कुछ पर लिखा था- पाकुड़ का डीसी कैसा हो, दिलीप झा जैसा हो. जब तक सूरज चांद रहेगा दिलीप झा तेरा नाम रहेगा. पाकुड़ डीसी जिंदाबाद-जिंदाबाद.

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