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पाक सरकार ने किया नवाज शरीफ को भगोड़ा घोषित, जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप  

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Islamabad: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाक सरकार ने भगोड़ा घोषित किया है. दरअसल नवाज शरीफ ने लंदन में अपने डॉक्टरों से जरूरी मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं कर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है. जिसके आरोप में सरकार ने शरीफ को भगोड़ा  घोषित कर दिया है. बुधवार को मीडिया में आयी एक खबर में यह जानकारी दी गयी.

शरीफ (70) इलाज के लिए पिछले साल नवंबर में लंदन गये थे. लाहौर उच्च न्यायालय ने मेडिकल आधार पर उन्हें चार सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी थी. शरीफ के डॉक्टर के अनुसार, पाक के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके शरीफ को दिल की गंभीर बीमारी है, जिसके लिए उनकी सर्जरी होनी है.

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देश नहीं लौटे तो होंगे घोषित अपराधी

डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, सरकार ने मंगलवार को शरीफ की जमानत अवधि न बढ़ाने और उन्हें इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित बोर्ड के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं करके  जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने पर भगोड़ा घोषित किया. प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में संघीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया.

सूचना पर प्रधानमंत्री की विशेष सहायक फिरदौस आशिक आवान ने कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, नवाज शरीफ के लंदन में किसी भी अस्पताल की अपनी मेडिकल रिपोर्ट न देने पर मेडिकल बोर्ड ने उनके द्वारा भेजे गये मेडिकल प्रमाणपत्र को खारिज कर दिया है. और उन्हें भगोड़ा घोषित किया है.

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उन्होंने कहा कि आज से कानून के अनुसार, नवाज शरीफ भगोड़े हैं और अगर वह देश नहीं लौटते हैं तो उन्हें घोषित अपराधी माना जाएगा.

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मेडिकल रिपोर्ट सौंपने के लिए कई बार लिखा पत्र

फिरदौस ने कहा कि चिकित्सकीय आधार पर शरीफ के मामले की देखरेख करने के लिए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की ओर से अधिकृत पंजाब सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखे. साथ ही   लंदन के किसी भी अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा. लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहे.

फिरदौस ने कहा कि उन्होंने केवल प्रमाण पत्र भेजा, जो मेडिकल बोर्ड में स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने पूछा कि अगर वह गंभीर रूप से बीमार हैं, तो बोर्ड को समग्र मेडिकल रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी जा रही है.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड शरीफ की बीमारी और उनके इलाज के बारे में जानना चाहता है. और जवाब देने में उनकी विफलता के कारण पंजाब सरकार ने उनकी जमानत अवधि (जो 24 दिसंबर 2019 में समाप्त हो चुकी है) आठ हफ्ते बढ़ाने के आवेदन को स्वीकार नहीं करने का निर्णय किया है.

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