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पहाड़ी मंदिर : श्रद्धा से दान किये गये 80 हजार रुपये बर्बाद, जिम्मेदारी तय करे प्रशासन

खोली गयी पहाड़ी मंदिर की दानपेटी,  कुल 4,49,500 रुपये की हुई गिनती, एक वरीय पदाधिकारी समेत पांच मजिस्ट्रेट लगे थे गिनती में, बुधवार को भी गिने जायेंगे पैसे

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Ranchi : पहाड़ी मंदिर में रखी कुल 23 दानपेटियों में से चार दानपेटियों को मंगलवार को प्रशासन द्वारा खोला गया. इन चार दानपेटियों में श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा से दान किये गये पैसों को गिना गया, तो पता चला कि इन पैसों में से लगभग 80 हजार रुपये के नोट सड़-गलकर बर्बाद हो चुके हैं. मंगलवार को नोटों की हुई गिनती से यह तो पता चल गया कि मंदिर में दान में दिये गये 80 हजार रुपये बर्बाद हो गये, लेकिन प्रशासन यह तय नहीं कर पाया है कि आखिर दान की इतनी बड़ी रकम (अभी तक) की बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन है.

दरअसल, पहाड़ी मंदिर में रखी दानपेटी को मंगलवार को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में खोला गया. सुबह सात बजे से ही नोटों की गिनती शुरू हो गयी. यह गिनती दिन भर चली. इसमें कुल 4,49,500 रुपये की गिनती हुई. इसमें 3,02,500 रुपये 5, 10, 20, 50, 100 और 500 के नोटों और 1,47,000 रुपये 1, 2, 5 और 10 रुपये सिक्कों के रूप में थे. इसके अलावा लगभग 80 हजार रुपये के नोट सड़े-गले और कटे-फटे थे. दानपेटी जब खोली गयी, तो इसमें रखे सभी नोट भीगे हुए मिले. सर्वप्रथम नोटों को सुखाया गया. उसके बाद इसकी गिनती की गयी. नोटों की गिनती के लिए डीसी राय महिमापत रे ने वरीय पदाधिकारी एनी रिंकी कुजूर, अरगोड़़ा सीआई कमलकांत वर्मा, हेहल सीआई दिलीप प्रसाद गुप्ता, कांके सीआई चंचल किशोर प्रसाद, ओरमांझी सीआई रंजीत रंजन एवं मांडर सीआई रमेश कुमार रविदास को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी.

पहाड़ी मंदिर : श्रद्धा से दान किये गये 80 हजार रुपये बर्बाद, जिम्मेदारी तय करे प्रशासन

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श्रद्धालुओं से भी गिनवाये पैसे

मंदिर में दान किये गये नोटों की संख्या अधिक होने के कारण उनकी गिनती करने का जिम्मा मंदिर में पूजा करने आये श्रद्धालुओं को भी दे दिया गया. मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर में छोटी-मोटी दानपेटी को मिलाकर कुल 23 दानपेटियां हैं. मंगलवार को दो बड़ी और दो छोटी दानपेटियों को खोला गया. इनमें से अच्छे नोटों के लगभग तीन लाख रुपये और चेंज सवा लाख रुपये गिनकर अलग किये गये. इसके अलावा कटे-फटे और सड़े नोटों (लगभग 80 हजार रुपये) को अलग किया गया. अभी शेष 19 दानपेटियों को खोला जाना बाकी है.

मंदिर में रखी लाखों रुपये की संपत्ति को देखनेवाला भी कोई नहीं है. मंदिर सुरक्षा के नाम पर एक सुरक्षा गार्ड भी नहीं है. मंदिर से पूरे राज्य भर के श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है. लोग अपनी मेहनत की कमाई से कुछ अंश इस मंदिर में दान करते हैं, लेकिन श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गयी राशि का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.

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चार महीने बाद खोली गयी दानपेटी

मंदिर समिति के सुनील माथुर ने बताया कि लगभग चार महीने बाद दानपेटी खोली जा रही है. चार महीने पहले तत्कालीन एसडीओ अंजलि यादव के आदेश के बाद दानपेटी को सील कर दिया गया था. सावन माह में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है. उसी भीड़ में दानपेटी में पानी और प्रसाद के टुकड़े चले गये, जिस कारण नोट सड़ने लगे. मंगलवार को हुई पैसों की गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गयी है.

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मंदिर के विकास के लिए श्रद्धालु करते हैं दान 

मधुकम से बाबा भोले नाथ के दर्शन करने आये सिंटू कुमार ने कहा कि वह मंदिर के विकास के लिए अपनी कमाई का कुछ अंश मंदिर में दान करते हैं, लेकिन यह तो मंदिर विकास समिति की लापरवाही है, जो श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान सड़ रहा है. यह अगर मंदिर की भलाई में लगाया जाता, तो मंदिर का काफी विकास होता.

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मंदिर समिति के सदस्य थे नदारद

वैसे तो पहाड़ी मंदिर में मंदिर विकास समिति के सदस्य जमे रहते हैं, लेकिन जब मंगलवार को मंदिर में मिली दान की राशि को गिनने के लिए दानपेटी खोली जानी थी, उस वक्त मंदिर समिति का कोई सदस्य मौजूद नहीं था. मजिस्ट्रेट कमलकांत वर्मा ने कहा कि इस वक्त मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों का रहना भी जरूरी था.

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