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पहाड़ी मंदिर : रांची प्रशासन और समिति के बीच हुआ विवाद, उर्मिला कंस्ट्रक्शन ने उठाया फायदा

Ranchi : पहाड़ी मंदिर रांची ही नहीं बल्कि झारखंड के एक धरोहर के रूप में देखा जाता है. इसे बचाने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए कदम सराहनीय थे. लेकिन जिस योजना के तहत पहाड़ी मंदिर का जीर्णोधार करना था, वो नहीं हुआ. जो भी जोश दिखा वो फ्लैग पोल लगाने तक ही दिखा. उसके बाद पहाड़ी बाबा के आगे सर झुकाने के अलावा किसी ने कोई काम नहीं किया. पहाड़ी मंदिर की दुर्दशा में रांची प्रशासन सबसे बड़ा जवाबदेह है. खासकर तत्कालीन डीसी मनोज कुमार के तबादले के बाद सारा मामला ठंडे बस्ते में चला गया. नए डीसी राय महिमापत रे ने सावन आने के महज चंद दिनों पहले पहाड़ी मंदिर का दौरा किया. वो भी तब, जब सीएम वहां जाने वाले थे. जबकि मेकॉन रांची प्रशासन को बार-बार पहाड़ी मंदिर की मरम्मत का काम पूरा करने को लेकर चिट्ठी लिख रहा था.

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पहाड़ी मंदिर विकास समिति की अंदरूनी कलह भी पहाड़ी मंदिर की दुर्गति के पीछे बराबर की हिस्सेदार है. न्यूज विंग ने पहाड़ी मंदिर की वो सारी बातें जानने की कोशिश की, जिसकी वजह से पहाड़ी और मंदिर की हालत खराब है. जिस तरह से रांची डीसी राय महिमापत रे मीडिया के सामने सारी जिम्मेदारी मेकॉन कंपनी पर थोपना चाह रहे हैं. दूसरी तरफ मेकॉन की उस चिट्ठी पर गौर नहीं फरमाते, जिसमें कंपनी ने साफ कहा है कि मॉनसून से पहले मरम्मत का काम पूरा कर लें, उससे यह साबित होता है कि वो और कुछ नहीं बस रांची प्रशासन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. सावन के तीन दिन पहले और सीएम के पहाड़ी मंदिर दौरे से दो दिन पहले जिस तरह से रांची प्रशासन लाव-लश्कर के साथ मंदिर पहुंचा, वही जोश पहले से दिखायी जाती तो आज हालात पहले से बेहतर रहते.

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परफेक्ट प्लान थी मेकान की

जेद्दा स्थित अब्दुल्लाह स्क्वायर चौक पर सउदी अरब का राष्ट्रीय झंडा लगा है. उसी तर्ज पर रांची के पहाड़ी मंदिर पर झंडा लगाना था. झंडा कैसे लगेगा, इसकी पूरी प्लानिंग देश की जानी-मानी कंपनी मेकान ने की थी. इस कंपनी को भारत सरकार ने मिनीरत्न कंपनी की लिस्ट में रखा. मेकॉन के ही नहीं बल्कि देश के जाने-माने इंजीनियर जेके झा को पहाड़ी मंदिर के लिए प्लान तैयार करने को कहा गया. इसमें फ्लैग पोल से लेकर पूरी पहाड़ी मंदिर परिसर का जीर्णोधार शामिल था. फ्लैग पोल के अलावा बाकी काम उर्मिला कंस्ट्रक्शन को दिया गया. उर्मिला कंस्ट्रक्शन ने उत्साहित होकर सारा काम सिर्फ लेबर कॉस्ट पर करने को तैयार हो गया. झारखंड में इसके अलावा कई और दूसरे कामों को भी कंपनी कर रही थी.

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मेकॉन का कहना था कि पहाड़ी मंदिर के पत्थर फ्रैगमेंटेड (टुकड़ेदार) हैं. पहाड़ी मंदिर के पत्थर को पैरामेलिंग कराया गया है. मेकॉन का दावा था कि अगर पैरामेलिंग के जरिए फ्लैग पोल लगाता है तो पहाड़ी गिर जाने पर भी फ्लैग पोल नहीं गिरेगा. पैरामेलिंग करते वक्त हार्ड रॉक्स मिल रहे थे. उससे भी करीब 25 मीटर नीचे तक जाकर सपोर्ट में लोहे के तारनुमा रॉड लगाए गए. उसे हार्ड सरफेस में एंकल किया गया. लगभग तीस ऐसे स्टील के धागे एंकल किए गये हैं. इस वजह से फ्लैग पोल का वजन पहाड़ी मंदिर पर है ही नहीं. पोल का वजन उसके नीचे के पत्थर पर ट्रांस्मीटेड है.

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आरआरडीए की दीवार है मुसीबत

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद बीआईटी मेसरा ने 16 ड्रील होल किए. ड्रील होल करने के बाद बियरिंग कैपेसिटी निकाली गयी थी. पोल के ऊपर में काफी खोखलापन भी रखा गया ताकि वजन कम रह सके. जियोलॉजिकल सर्वे होने के बाद रिपोर्ट में यह कहा गया था कि आरआरडीए की जो दीवार है, जिसे रिटेनिंग वॉल कहते हैं, वो पहाड़ी मंदिर के फॉल्ट लाइन के ऊपर था. जो भी खतरा था वो दीवार की वजह से ही था. जियोलॉजिकल सर्वे में साफतौर से उल्लेख है कि यह दीवार नहीं बननी चाहिए थी. लेकिन वो बन चुकी थी. इसके उपाय के लिए जियोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने कहा था कि मंदिर के चारों तरफ पैरामेलिंग करा दिया जाए. उससे पहाड़ का स्ट्रेंथ बढ़ जाएगा.

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सदस्यों के बीच का मनमुटाव का फायदा उर्मिला कंस्ट्रक्शन ने उठाया

उधर सदस्यों के बीच मनमुटाव उभरकर सामने आने लगा. इस चीज का फायदा उर्मिला कंस्ट्रक्शन ने खूब उठाया. उर्मिला कंस्ट्रक्शन के दूसरे काम, जो झारखंड में चल रहे थे, उसकी भी स्थिति ठीक नहीं चल रही थी. कंपनी के पास कैश क्रंच आ गया. किसी भी तरह उर्मिला कंस्ट्रक्शन इस काम से अपना हाथ खींचना चाहती थी. उसने चैरेटी के तौर पर पहाड़ी मंदिर के काम को लिया था. कंपनी का कहना था कि कंपनी और कोई चार्ज नहीं करेगी. सिर्फ लेबर का कॉस्ट चार्ज करेगी. बाद में घाटा होने पर कंपनी बहाना खोजने लगी कि कैसे काम से छुटकारा मिले. पहाड़ी मंदिर के नीचे के दुकानों को लेकर भी काफी विवाद है. कई लोग चाहते हैं कि उन दुकानों पर उनका कब्जा हो जाए. नीचे के दुकानों का एक अलग संघ बना हुआ है. रांची सदर के एसडीएम बनकर भोर सिंह यादव आए. लेकिन उन्होंने पहाड़ी मंदिर विकास समिति के सचिव रहते हुए विवाद को खत्म नहीं किया. विवादों में पहाड़ी मंदिर के सदस्यों को उलझता देख उर्मिला कंस्ट्रक्शन ने काम करना बंद कर दिया. काम के लिए मैटेरियल ना मिलना उसके लिए बेजोड़ बहाना बना. इतना सब कुछ होते हुए भी रांची प्रशासन ने कभी रिटेंडर भी करने की जहमत कोई नहीं उठायी.

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