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साल भर पहले बेचा था धान, अब तक पैसे के लिए तरस रहे 700 किसान

♦अब शुरू हो जायेगी दूसरी फसल की कटनी

Ranchi : राज्य के किसानों को करीब साल भर बाद भी सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीदारी का पैसा नहीं मिल पाया है. राज्य के नौ जिलों के करीब 700 किसानों को धान बेचने के बाद अभी तक पैसे के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. धान अधिप्राप्ति की नियमावली के अनुसार 7 दिन में भुगतान होना चाहिए. इसमें सबसे अधिक 430 किसान हजारीबाग जिले से हैं, जहां से किसानों ने इस बार रिकार्ड धान की बिक्री की है. झारखंड स्टेट फूड कॉरपोरेशन (जेएसएफसी) और जिला आपूर्ति कार्यालय का रोज चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन यह बतानेवाला कोई नहीं है कि भुगतान कब होगा. जिन जिलों में भुगतान नहीं हो पाया है उसमें चतरा, गढ़वा, गुमला, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदगा, पलामू, सिमडेगा व पश्चिम सिंहभूम शामिल हैं.

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अधिकतर जिलों के किसानों को मिल चुका है पूरा पैसाः विभाग

इस संबंध में खाद्य-आपूर्ति विभाग का कहना है कि अधिकतर जिलों में किसानों को पूरा पैसा मिल चुका है. तीन-चार जिलों में एक-दो किसानों का पैसा बाकी है, साथ ही जिन जिलों में किसानों की संख्या अधिक है वहां पैसे का भुगतान हो रहा है. कुछ तकनीकी गड़बड़ी थी जिसे दूर कर लिया गया है.

लॉकडाउन के बीच किसानों को उम्मीद थी कि उनकी हालत देख सरकार उनके बेचे हुए धान का कम से कम पूरा पैसा दे देगी. लेकिन इस कोविड अवधि में यह पूरा नहीं हो पाया. अब जब धान पकने का समय आ चुका है इसके बाद भी पिछले वर्ष का पूरा पैसा नहीं मिल पाया है. पिछले साल खरीफ की फसल में लगायी गयी लागत अभी तक उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है. मालूम हो कि इससे पहले सितंबर तक पांच हजार से अधिक किसानों को पैसा नहीं मिल पाया था. इस बीच इन किसानों ने खुद से पैसे का इंतजाम कर धान की खेती की थी.

सरकार ने लक्ष्य से 70 प्रतिशत तक अधिक धान की खरीद की थी

सरकार ने पहली बार लक्ष्य से अधिक रिकार्ड धान की खरीदारी की थी. पिछले वर्ष धान खरीदारी का लक्ष्य 30 लाख क्विंटल रखा गया था. जिसके बाद किसानों ने लॉकडाउन में हो रही आर्थिक मंदी को देखते हुए सरकार को करीब 39 लाख क्विंटल धान बेचा. सरकार की ओर से इनसे 20 रुपये किलो की दर से धान की खरीदारी की गयी थी.

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पैसा समय पर नहीं मिलने से बिचौलिये उठा रहे लाभ

किसानों को समय से पैसा नहीं मिलने के कारण अब बिचौलिये इसका लाभ उठाने लगे हैं. अभी से ही गांवों में बिचौलिये किसानों से धान खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार उन्हें पैसा देने में साल भर का वक्त लगाती है लेकिन वे धान खरीदते ही उन्हें तुरंत पैसे का भुगतान कर देंगे. इस संबंध में कुछ किसानों ने पंचायत स्तर पर शिकायत की है, जिसकी सूचना विभाग को भी दी गयी है.

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