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एमएसपी पर धान खरीदी का लक्ष्य 10 लाख क्विंटल बढ़ा, सात जिलों से खरीदारी कम

सरकारी व्यवस्था इतनी लचर कि अधिकतर किसानों ने बिचौलियों को अब तक बेच दिया धान

Ranchi: राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीदी का लक्ष्य बढ़ा दिया है. अभी तक यह लक्ष्य 4.5 लाख क्विंटल था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 5.5 लाख क्विंटल कर दिया गया है. सरकार ने किसानों से धान खरीद की तय सीमा भी हटा दी है.

अब किसानों के पास जबतक धान रहेगा वे बेच सकेंगे, लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सूबे के सात जिलों से धान खरीदारी की रफ्तार काफी कम है. इन जिलों में गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़, दुमका, खूंटी, गुमला और सरायकेला-खरसांवा शामिल हैं.

एक ओर सरकार बंपर पैदावार होने का दावा कर रही है और धान खरीदारी का लक्ष्य भी बढ़ा दिया है, लेकिन दूसरी ओर किसानों का धान खरीदने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई. नवंबर में धान खरीदारी शुरू हुई लेकिन वो सिर्फ कागजों में.

इसके बाद हो-हंगामा होने के बाद दिसंबर के दूसरे सप्ताह से किसी तरह इसकी शुरुआत की गई. लेकिन इसमें भी 90 प्रतिशत तक कोई तैयारी नहीं थी. अधिकतर जगहों पर धान क्रय केंद्र जनवरी तक खुले ही नहीं.

इसके बाद भी जब खुले धान क्रय केंद्रों से किसानों का धान गीला बताकर उनसे खरीदा ही नहीं गया, जिसका सीधा लाभ बिचैलियों ने खूब उठाया.

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पाकुड़ व साहेबगंज सबसे पीछे

पाकुड़ व साहेबगंज जिले में धान खरीदारी सबसे कम है. इन जिलों से 15 से 17 हजार क्विंटल ही धान खरीदारी हो सकी है. इन जिलों में किसानों की संख्या भी काफी है. साहेबगंज से 3900 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि धान बिक्री के लिए सिर्फ 300 किसान ही पहुंचे.

दूसरी ओर पाकुड़ से 1600 किसानों में से 233 ने ही धान बिक्री की है. वहीं, गोड्डा से 42 हजार क्विंटल, सरायकेला से 44 हजार क्विंटल, दुमका से 59 हजार क्विंटल, खूंटी से 42 हजार क्विंटल और सिमडेगा से 39 हजार क्विंटल धान की बिक्री किसानों ने की है. अभी तक कुल नए लक्ष्य के मुकाबले 66 प्रतिशत धान की खरीदारी कर ली गई है.

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