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प. बंगाल सरकार जनगणना परिपत्र में सरना धर्म को शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजे

धर्मकोड की मांग को लेकर कोलकाता में हुआ सरना धर्म महासम्मेलन

Ranchi : सरना धर्मकोड की मांग को लेकर सोमवार को कोलकाता में सरना धर्म महासम्मेलन का आयोजन हुआ. यह आयोजन आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के तत्वावधान में हुआ.

कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में हुए इस सम्मेलन की अध्यक्षता धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने की. इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार से मांग की गयी कि जनगणना परिपत्र में सरना धर्म को शामिल करने के लिए प्रस्ताव सदन से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाये.

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सभा को संबोधित करते हुए धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि भारत में 15 करोड़ से अधिक आदिवासी समुदाय वास करते हैं जो भारत के प्रथम नागरिक हैं. उन्होंने कहा कि हम हिंदू या दूसरे धर्म का पालन नहीं करते बल्कि प्रकृति के उपासक हैं. आदिवासियों में 781 प्रकार के जनजातीय समुदाय हैं जिन्हें भारत के संविधान द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की कुल आबादी की लगभग 13% आबादी आदिवासी समुदाय की है और 2011 की जनगणना में 04 लाख से अधिक आदिवासियों ने अपना धर्म सरना लिखा है. वहीं पूरे भारत में लगभग 50 लाख आदिवासियों ने सरना धर्म दर्ज करवाया है. इसके बावजूद अबतक जनगणना परिपत्र में अलग से सरना धर्म कोड दर्जा का नहीं किया गया. जबकि 44 लाख आबादीवाले जैन समुदाय का अलग धर्म कोड है.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हमारी भावना व धार्मिक पहचान की लड़ाई को समझे. हमें उम्मीद है कि वे सदन से सरना धर्म कोड पारित कर केन्द्र सरकार को भेजेंगी ताकि 2021की जनगणना परिपत्र में सरना धर्म शामिल हो सके. बंधन तिग्गा ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो पूरे पश्चिम बंगाल में आंदोलन चलाया जायेगा.

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सम्मेलन में शामिल पश्चिम बंगाल सरकार के कैबिनेट मंत्री पुनेंदू बासु ने कहा कि वर्षों से आदिवासी समुदाय का शोषण होता रहा है. वो अपनी धार्मिक पहचान के लिए संघर्षरत हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार जल्द ही सरना धर्म कोड पर निर्णय लेगी. जरूरत पड़ने पर सरना धर्म कोड के लिए दिल्ली तक आंदोलन में साथ दिया जायेगा.

इसके पूर्व राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मगुरु बंधन तिग्गा के नेतृत्व में सियालदाह स्टेशन से हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों ने हाथों में तख़्ती के साथ पैदल मार्च करते हुए नेताजी स्टेडियम में पहुंचे. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के हावड़ा, हुगली, मालदा, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, सिल्लीगुड़ी, कूच बिहार, बांकुड़ा, पुरुलिया, मुर्शिदाबाद, मेदिनीपुर, सुंदरवन, उतर 24 परगना, नदिया, आदि जिलों से भी लोग शामिल हुए.

सम्मेलन की शुरुआत मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर माल्यर्पण कर किया गया.
सम्मेलन को मदन मित्रो पूर्व मंत्री, कोस्तव राय, बिरसा तिर्की, भगवान दास मुंडा, वीरेंद्र भगत, भीमवार मुर्मू, लखी नरायाण सिंह, मंगल सिंह बोबोंगा, मंगल सोरेन, सीताराम कुजूर, भगवान दास मुंडा, जीतू उरांव, मणीलाल केरकेट्टा, रामा उरांव, सुशील उरांव,बिगल चिक बड़ाइक, प्रलाहद पूर्ति, देव दुलाल मुर्मू, गोपाल उरांव, विजय लोहरा सहित अन्य ने भी संबोधित किया.

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