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विगत चार सालों में अकड़ बढ़ गयी और झारखंड बन गया लूट-खसोट का चारागाह

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RP Shahi

यह विज्ञापन झारखंड के विकास के वास्तविक रूप को ही दर्शाता है. चेहरे जो अब सपनों में भी दिखने लगे हैं को प्राथमिकता, इनका नारा पढ़ा जा सकता है, लेकिन क्या किया यह साफ नहींं. या तो इनकी अंतरात्मा जाग गई और कुछ भी साफ कहने से रोक लिया या पत्र के विज्ञापन विभाग ने भी इनके झूठ को दबाकर रखने का नायाब रास्ता ढूंढ लिया.

विगत चार वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि, जो हमें दिखती है वह है कुछ लोगों से मिलकर खुली लूट करना व समाज,अखबार, मीडिया में उजागर किए जाने वाले भ्रष्टाचार को फाइलों में बंद कर जांच रोक देना. क्या किसी घोटाले की 4 साल में जांच हुई? इसके मायने तो यही लगेंगे कि उपर तक घोल फैला है.

*इसे तो हम उपलब्धि ही मानेंगे कि लूट के लिए जेबीवीएनएल को माध्यम बना राज्य को 7000 करोड़ का चूना लगाने व कुछ कॉरपोरेट को लाभ पहुंचाने के लिए सोलर विद्युत का रेट 4.9 0

SMILE

प्रति यूनिट कैबिनेट से पास करा लिया. आयोग की आज्ञा के बाद यह निरस्त हुआ, लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई !

*खान घोटाले में उच्च न्यायालय की टिप्पणी और महाअधिवक्ता पर संदेह के पश्चात भी मामला दब गया.

*सभी शहरी परियोजनाओं में संपूर्ण रूप से घपले हुए, लेकिन जनता के चिल्लाने, मीडिया के सतर्क करने पर भी किसी भी काम में जांच न हो सकी, न कोई काम या ठेकेदार रूका.

  • पॉलिटेक्निक में अवैध प्रिंसिपल रखने के मामले में लोकायुक्त में भी जांच के आदेश दिये, लेकिन वह आदेश कहां गया किसी को भी नहींं पता.

  • यह पहली सरकार होगी जो समाज के प्रतिष्ठित लोगों से दूर रहती है. विगत चार सालों में इतने व्यवसायिक समारोह हुए, लेकिन किसी में भी राज्य के व्यापारिक या औद्योगिक संघों को साथ नहीं रखा गया. बाहर से आये लोगों ने सभी कार्यक्रम किए करोड़ों लूटे व लुटाए व चले गए .

  • जैसे छननी से हम उबली चाय छानते हैं और उसमें रंगविहीन, स्वाद विहीन कचरा ही रहता है. कुछ-कुछ वैसी ही हालत प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों की भी रह गई है. बस थोड़े से ही बहादुर बचे हैं, जो समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. जहां दरबार लगी हो और चारण गा रहे हों, वहां बुद्धिमान क्या करेंगे?

  • समाज से सलाह लेने की बात तो दूर,एक मेमें जिसमें मुमं स्वयं मिर्ची लगी बोल रहे हैं को सोशल मीडिया पर डालने वाले नवयुवक को जेल भेज दिया और वह भी वहींं पुलिस जो बालकों को नक्सल दिखाकर गोली मारती है.

  • हां, उपलब्धियों में कौशल विकास के नाम पर सालों से चल रहे लूट भी अद्वितीय है. तीन साल पहले उजागर हुआ कि फर्जी कंपनियों ने करोड़ों के घपले किए और झूठी नौकरी दिखाकर पैसे लिए, लेकिन मजाल है कोई कार्रवाई हो ! पुन: वह कंपनी दूसरे नाम से कई घोटाले कर रही है.

  • बेवजह विदेश घूमने, जनता के पैसे बर्बाद करने, बाहरी सलाहकारों, ठेकेदारों के साथ मिलकर लूटने का सिलसिला शुरू है, हमें डर यह है कि अगले शासन में भी कहीं यह लोग ही हावी न रहें.

वैसे जब सभी विभागों में एर्नेस्ट और यंग के लोग बैठकर काम कर रहे हों, तब सरकार की बुद्धिमत्ता के बारे में राय देना भी अजीब लगता है .

विगत चार सालों में अकड़ बढ़ गई, लूटकर से रोकटोक हट गई, उपर से नीचे तक जनता कहीं नहीं. मेरी छोटी राजनीतिक सोच से हम कहीं के उपनिवेश बनकर रह गए हैं और अपने को जनता का सेवक कहने वाला राजा केवल महाराजा को ही प्रसन्न रखने से संतुष्ट हो जाता है. जनता कहीं नहीं .

(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और ये उनके निजी विचार हैं)

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