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कोयला कंपनियों पर बकाया मामलाः महेश पोद्दार ने कहा- यूपीए सरकार ने ठगा, केंद्र ने झारखंड को दिये 250 करोड़

Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि कोयला कंपनियों पर झारखंड का बकाया मामले में कांग्रेस गंदी राजनीति कर रही है. सांसद ने इस संबंध में कोयला मंत्रालय से मिली जानकारी को आधार बनाया है.

कहा है कि कोयला कंपनियों पर भूमि लगान के हजारों करोड़ के बकाये के राज्य सरकार के दावे का पर्दाफ़ाश हो गया है. इस मामले में झारखण्ड सरकार में शामिल कांग्रेस की कुटिलता और भाजपा की उदारता खुलकर सामने आ गयी है. राज्य सरकार का यह दावा कि पहली बार राज्य की किसी सरकार ने राज्य के अधिकार की चिंता की है, झूठा है.

जुलाई, 2020 में केंद्रीय कोयला मंत्री झारखंड आये थे. इसमें झारखण्ड सरकार के साथ भूमि लागत के भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गयी थी. इसके बाद मंत्रालय द्वारा 250 करोड़ का भुगतान भी सरकार को किया गया था.

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केंद्र का मिलता रहा है सहयोग

महेश पोद्दार के मुताबिक कोयला कंपनियों पर बकाया मामले में राज्य सरकार को पूरी जानकारी होनी चाहिये. इस मामले में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने झारखण्ड के प्रति ज्यादा उदार रवैया दिखाया है. पिछले साल 30 जुलाई को रांची में झारखण्ड के सीएम के साथ केन्द्रीय कोयला मंत्री औऱ केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा की बैठक हुई थी.

कोयला मंत्री ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की तुलना में संवेदनशीलता दिखायी थी. बैठक में सैद्धांतिक रूप से निर्णय लिया गया कि सीबीए अधिनियम के तहत अधिग्रहित सरकारी भूमि का भुगतान कृषि भूमि के वर्तमान सर्किल दर के अनुसार किया जायेगा.

सीसीएल द्वारा अधिग्रहित भूमि के संयुक्त सत्यापन के बाद राज्य सरकार को मुआवजे का भुगतान किया जायेगा. साथ ही यह निर्णय भी लिया गया था कि सीसीएल द्वारा अधिग्रहित सरकारी भूमि का ठीक परिमाप निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार सीआईएल,सीसीएल के अधिकारियों के साथ एक समिति गठित करेगी.

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बकाया मामले में झूठ का पर्दाफाश

सीबीए अधिनियम, 1957 (धारा 18 क) के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा दिए गए खनन पट्टे के तहत उसे रॉयल्टी का भुगतान किया जाता है. कोयला कम्पनियां राज्य सरकार को समय-समय पर निर्धारित ऐसी रॉयल्टी का भुगतान कर रही है.

2014 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी. उस दौरान उसने कोयला खदानों के ऊपर भूमि लगान बकाये के मसले पर राज्य को ठेंगा दिखा दिया था. टके सा जवाब दिया था. उस दौरान भी झारखण्ड का नेतृत्व हेमंत सोरेन ही कर रहे थे. कांग्रेस और आरजेडी तब भी सरकार में शामिल थे.

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