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 एनआरसी ड्राफ्ट से 40 लाख बाहर होने पर संसद में घमासान, बोले राजनाथ- ड्राफ्ट अंतिम नहीं है  

असम में सोमवार को जारी नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के फाइनल ड्राफ्ट पर विपक्षी पार्टियां घमासान मचा रही हैं. लोकसभा व राज्यसभा में सोमवार को हंगामा मचा रहा.

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NewDelhi : असम में सोमवार को जारी नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के फाइनल ड्राफ्ट पर विपक्षी पार्टियां घमासान मचा रही हैं. लोकसभा व राज्यसभा में सोमवार को हंगामा मचा रहा. खास कर तृणमूल कांग्रेस ने फाइनल ड्राफ्ट से 40 लाख लोगों के बाहर होने के मुद्दे पर राज्यसभा में सरकार को निशाने पर लिया. हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई. उधर लोकसभा में भी विपक्षी सदस्य हो-हल्ला और ड्राफ्ट के विरोध में नारेबाजी करते रहे. इस क्रम में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बयान दिया कि इस मुद्दे पर हंगामा नहीं किया जाये. कहा कि जिसका भी नाम ड्राफ्ट में नहीं है उसे दावा करने का भरपूर मौका मिलेगा.

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नाम नहीं होने पर एनआरसी में दावा पेश कर सकते हैं

बता दें कि राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि यह ड्राफ्ट अंतिम नहीं है. इसके बाद भी दावा किया जा सकता है. कहा कि जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम ड्राफ्ट में होना चाहिए वह एनआरसी में अपना दावा पेश कर सकते हैं. राजनाथ सिंह के अनुसार उनके दावे का निपटान कितने दिन में होगा यह सुप्रीम कोर्ट तय करेगी. संतुष्ट नहीं होने पर फॉरनर्स ट्राइब्यूनल में अपील की जा सकती है.  गृहमंत्री ने सदन से अपील की कि इसमें सभी का सहयोग मिलना चाहिए.
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 सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है

यह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है. इस संवेदनशील मुद्दे पर हंगामा नहीं करें. बता दें कि लोकसभा में टीएूसी, कांग्रेस और लेफ्ट ने यह मुद्दा उठाया. लेकिन गृहमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष लोकसभा से वाकआउट कर गया. राजनाथ सिंह ने कहा, कुछ लोग बिना वजह  हंगामा मचाने की कोशिश कर रहे हैं. यह पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट है. कहा कि कोई भी भ्रामक जानकारी नहीं फैलाई जानी चाहिए. यह कोई फाइनल लिस्ट नहीं बल्कि ड्राफ्ट है. बताया गया है कि नागरिकता के लिए 3,29,91,380 लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 2,89,38, 677 नागरिकता के लिए योग्य पाये गये हैं.

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यह भाजपा की वोट बैंक पॉलिटिक्स है : ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फाइनल ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं होने पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया. ममता ने बांग्ला कार्ड खेलते हुए गृहमंत्री की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ समुदाय और भाषा विशेष के लोगों को जबरन निशाना बनाया जा रहा है. ममता ने आरोप लगाया कि आधार कार्ड, पासपोर्ट रहने के बावजूद लिस्ट में लोगों का नाम नहीं है. लोगों के नाम लिस्ट में से जानबूझ कर हटाये गये हैं.ममता ने कहा कि सिटिजन रजिस्टर की लिस्ट से बंगाली प्रभावित होंगे. जिन 40 लाख लोगों के नाम लिस्ट में नहीं हैं, वह कहां जायेंगे? क्या सरकार के पास उनके पुनर्वास के लिए कोई प्रोग्राम है. आखिरकार इसे बंगाल को ही भुगतना पड़ेगा.  यह भाजपा की वोट बैंक पॉलिटिक्स है. ममता ने गृह मंत्री से आग्रह किया कि वह इसमें संशोधन करें.

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