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ऑनलाइन शिक्षा : 1.20 लाख बच्चों में से 27 फीसदी ही जुड़े नेटवर्क से, अभिभावकों को सता रही चिंता

Jamtara :  कोरोना के कारण लॉकडाउन में स्कूली बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है. बच्चों की पढ़ाई नष्ट होता देख अभिभावक भी चिंतित हैं. भले ही सरकार ऑनलाइन पढ़ाई की बात करे, लेकिन सभी बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पायी. खासकर गरीब तबकों के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई नहीं मिल पायी. एंड्रॉइड मोबाइल की कमी के कारण जिले के 70 प्रतिशत बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पायी. इससे अभिभावकों में जहां डर है, वहीं मोबाइल की कमी से बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा नहीं मिलने का भी मलाल उनमें देखा जा रहा है.

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जिले में 27 प्रतिशत को ही मिली ऑनलाइन शिक्षा

 

सरकार के आदेशानुसार बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जानी थी. इसके लिए जिले के सभी सीआरपी को व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर बच्चों को जोड़ना था. लेकिन जामताड़ा जिला में मात्र 27 फीसदी बच्चों को ही ग्रुप में जोड़ा जा सका. इसका मुख्य कारण एंड्रॉइड मोबाइल की कमी बताया जा रहा है. ऐसी स्थिति में बच्चों के  भविष्य को लेकर अभिभावक चिंतित हैं.

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 1 लाख 20 हजार बच्चों में 40 हजार बच्चों को ग्रुप से जोड़ा गया

जामताड़ा जिला में वर्ग एक से लेकर 9 वी तक कुल 1.20 लाख बच्चों में मात्र 40 हजार बच्चों को ही व्हाट्सएप्प ग्रुप में जोड़ा गया है. इतने बच्चों को ही ऑनलाइन शिक्षा मिली. शेष बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पायी. ऐसे बच्चों जे अभिभावकों को बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है.

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कहां कितने बच्चों को ग्रुप से जोड़ा गया-

  • फतेहपुर प्रखंड में सौ फीसदी स्कूल में ग्रुप बनाया गया, 26 फीसदी छात्रों को जोड़ा गया.
  • जामताड़ा प्रखंड में 99 फीसदी स्कूल में ग्रुप बने, 30 फीसदी बच्चों को जोड़ा गया.
  • कर्माताड़ प्रखंड के 99 फीसदी स्कूल में ग्रुप बने, 28 फीसदी बच्चों को जोड़ा गया.
  • कुंडहित प्रखंड के 96 फीसदी स्कूल में ग्रुप बने, 27 फीसदी बच्चों को जाड़ा गया.
  • नाला प्रखंड के 96 फीसदी स्कूल में ग्रुप बने, 23 फीसदी बच्चों को जोड़ा गया
  • नारायणपुर प्रखंड के 95 फीसदी स्कूल में ग्रुप बने, 31 फीसदी बच्चों को जोड़ा गया.

क्या कहते हैं अभिभावक

अभिभावक मोहन मंडल, संजय साह, बिपद मंडल, तन्मय माजी, सोहन लाल, अजय मंडल ने कहा कि बच्चों के अभिभावकों के पास इतने पैसे नहीं थे कि बच्चों के लिए एंड्रॉइड मोबाइल खरीद पाते. कोरोना ने रोजगार छीना. लगभग तीन महीने कैसे दिन बीते, ये हम ही जानते हैं. ऐसी स्थिति में बच्चों को कहां से मोबाइल देते. सरकार जब स्कूल के शिक्षक, सीआरपी को टैब दे सकती है तो क्या बीपीएल बच्चों को एक मोबाइल नहीं दे सकती है. सरकार ने दूरदर्शन में पढ़ाई के नाम पर इतनी राशि खर्च कर दी. लेकिन मोबाइल देने के बारे में नहीं सोचा.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

एडीपीओ संजय कापरी कहते हैं कि एंड्रॉइड मोबाइल की कमी के कारण मात्र 27 फीसदी बच्चों के अभिभावकों को ही व्हाट्सएप्प ग्रुप में जोड़ा गया. शेष बच्चों को नेटवर्क से नहीं जोड़ा जा सका.

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