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हमारी पहचान भारतीय, जाति -धर्म का विभाजन हमारे खून में नहीं : सीआरपीएफ

सीआरपीएफ ने पुलवामा हमले में शहीद 40 जवानों की जाति को लेकर एक पत्रिका में छपी रिपोर्ट पर आक्रोश जताया है

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NewDelhi : सीआरपीएफ ने पुलवामा हमले में शहीद 40 जवानों की जाति को लेकर एक पत्रिका में छपी रिपोर्ट पर आक्रोश जताया है. बता दें कि दुनिया के सबसे बड़े अर्द्धसैन्य बल सीआरपीएफ ने अपने मुख्य प्रवक्ता के टि्वटर हैंडल के जरिये कहा है, सीआरपीएफ में हमारी पहचान भारतीय के तौर पर है. जाति-धर्म मायने नहीं रखता. इस संबंध में मुख्य प्रवक्ता और डीआईजी एम दिनाकरण ने ट्वीट किया, सीआरपीएफ में हमारी पहचान भारतीय के तौर पर है. जाति, रंग और धर्म का यह दयनीय विभाजन हमारे खून में मौजूद नहीं है. उन्होंने पत्रिका की खबर को टैग करते हुए कहा कि शहीदों का अपमान नहीं करना चाहिए. कहा कि रिपोर्ट में आंकड़ों के रूप में इस्तेमाल कर उनका अपमान नहीं करना चाहिए. दिनाकरण के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए रिटायर्ड मेजर गौरव आर्या लिखते हैं, दिनकरण सर, आप पर गर्व है. आपके एक ट्वीट ने निंदनीय लेख को खारिज कर दिया.

जब कोई जवान एक बार वर्दी पहन लेता है, वह सिर्फ भारतीय होता है

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जब कोई जवान एक बार वर्दी पहन लेता है, वह अपनी अन्य पहचान छोड़ देता है. वह सिर्फ भारतीय होता है. जब उसका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ वापस आता है तो वह भारत मां का बेटा होता है. सीआरपीएफ ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर में भयावह आतंकी हमले में शहीद हुए अपने 40 जवानों की शहादत को न तो भूलेगा और न ही माफ करेगा बल्कि इसका बदला लेगा. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, हम पुलवामा हमले में शहीद हुए अपने जवानों को सलाम करते हैं और शहीद भाइयों के परिवारों के साथ खड़े हैं. इस क्रूर हमले का बदला लिया जाएगा. इससे पहले सीआरपीएफ ने लोगों को शहीदों के क्षत-विक्षत शवों के बारे में फर्जी तस्वीरें प्रसारित करने के खिलाफ परामर्श जारी किया था.

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