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वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के विरोध में ग्रामीण हुए संगठित, 29 सितंबर को होगी सभा

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Ranchi: झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा व्याघ्र संरक्षण प्लान के तहत पलामू व्याघ्र परियोजना के विस्तारीकरण एवं वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का प्लान बनाया है. इस परियोजना का क्षेत्र के ग्रामीणों के द्वारा विरोध किया जा रहा था. अब पलामू व्याघ्र परियोजना के विस्तारीकरण के नाम पर विभाग द्वारा 8 गांव को कोर एरिया में शामिल कर रैयतो को गांव खाली करा कर अन्यत्र बसने के लिए इको विकास समिति के अध्यक्ष को 29 मई 2017 को पत्र भेजा गया था. इसके बाद से ही क्षेत्र के ग्रामीण परियोजना के विरोध गोलबंद होने लगे थे. वहीं आठ गांव की ग्रामसभा के द्वारा गांव नहीं खाली करने जुड़ा पत्र संबंधित विभाग को भेज दिया है. इसके बाद भी विभाग के द्वारा अमल नहीं किये जाने पर ग्रामीण अक्रोशित हैं.

वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के लिए गांव खाली करने की खबर मीडिया में आने के सवाल पर जेरोम जेराल्ड कुजूर ने बताया कि दो गांव के सहमति की खबर मीडिया के माध्यम से लगातार आ रही है. लेकिन, गांव के लोगों से बातचीत करने पर जानकारी मिल रही है कि जिला प्रशासन लगातार मीडिया के माध्यम से समाचार देकर गांव के लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है. उन्‍होंने बताया कि दूसरी सूचना यह भी है कि लोग गांव छोड़ना नहीं चाहते. आठ गांव को दिए गए पत्र को हम प्रथम फेज मानते हैं. बल्कि 31 दिसंबर 2007, अधिसूचना संख्या वाइल्ड लाइफ 6589 की कोर एरिया से संबंधित जो अधिसूचना जारी की गई है. उसमें कोर एरिया का कुल क्षेत्रफल 414.08 वर्ग किलो मीटर है. पलामू वन्य जीव अभ्यारण (क्षेत्रफल 200.54वर्ग किलो मीटर) और बेतला राष्ट्रीय उद्यान (क्षेत्रफल 213.54 वर्ग किलो मीटर) मिलकर 38 आरक्षित वन क्षेत्र से बनाया गया है. यह क्षेत्र उतर में बेतला जंगल, बड़ी चट्टान, और मोरवई , पूर्व में चुन्गरू, हरातु, लड़ी, लाभर, मुंडू, और दूसरे पूर्वी गारू, के सूरक्षित जंगल, दक्षिण में नेतरहाट, दौना, दुरूप, बाड़ेसाड़ और चेतमा के बाडेसाड़ वन क्षेत्र और पशिचम में कुटकू जंगल क्षेत्र के चेमो और सानिया जंगल और छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के जंगल को कोर एरिया में शामिल किया गया है.

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वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के लिए कितनी जमीन की जरूरत

व्याघ्र संरक्षण प्लान के तहत विभाग ने 6 वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव भी बनाया है. जिसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर होने की बात कही जा रही.

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  • सिरसी-पालकोट-सारंडा कॉरिडोर तहत 214 गाँव के 1,87,733 एकड़
  • कुमानडीह- पतकी लावालोंग कॉरिडोर के लिए 51 गांव के 34,559.33 एकड़
  • लावालोंग-तुतिलवा-हजारीबाग कॉरिडोर के लिए 151 गांव के 91,680.81 एकड़
  • लावालोंग- गौतम बुध्दा कॉरिडोर के लिए 243 गांव के 1,32,492.54 एकड़
  • लावालोंग-मनातु-पाटन- कैमूर(बिहार) कॉरिडोर के लिए 83 गांव के 43,798.90 एकड़
  • कुटकु-सलवाही-नगरउंटारी-कैमूर (उतरप्रदेश) कॉरिडोर के लिए 132 गांव के 1,05,009.37  एकड़  चिन्हित की गई है.

पलामू व्याघ्र संरक्षण प्लान के तहत कोर एरिया के नाम पर 8 गांव के विस्थापन एवं वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के खिलाफ में केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति के द्वारा 29 सितम्बर 2018 को अरमू मोड़, गारू, लातेहार में 11 बजे से विरोध सभा का आयोजन किया है. जिसमें नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम, एवं पलामू व्याघ्र परियोजना वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से प्रभावित लोगों के भारी संख्या में जमा होंगे. कार्यक्रम में विशिष्‍ट अतिथि के रूप आदिवासी परामर्शदात्री परिषद के सदस्य रतन तिर्की, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस झारखण्ड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधायक सुखदेव उरांव, अरुण उरांव, सी.पी.आई. के राज्य सचिव केडी. सिंह, सीपीआई.(एमएल) के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, सीपीएम के राज्य सचिव जीके बक्शी राजद के रामचंद्र सिंह, कांग्रेस लातेहार के जिला अध्यक्ष मुनेश्वर उराँव, व अन्य राजनीति दलों के नेता भी उपस्तिथि रहेंगे.

 

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