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प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश के विरोध में संगठन, कहा- केंद्र सरकार कारखानों का कर रही निजीकरण

Ranchi : देश भर में केंद्र सरकार के प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश का विरोध किया जा रहा है. शुक्रवार को राज्य में भी चार सौ जगहों पर इसका विरोध हुआ. विरोध देशव्यापी विरोध के तहत किया गया, जिसमें ट्रेड, किसान, बैंक, बीमा, खनन कर्मियों और मजदूरों ने हिस्सा लिया.

इसकी जानकारी देते हुए एआइसीटीयू के शुभेंदु सेन ने बताया कि राज्य में विरोध का व्यापक असर रहा. रक्षा कर्मियों की ओर से लगातार इसका विरोध किया जा रहा है. सरकार ने इस साल जून में प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश लागू किया.

केंद्र सरकार अब इन कारखानों का भी निजीकरण करना चाहती है, जो देश और नागरिकों की सेवा में इस्तेमाल होते है. जिसका विरोध जारी रहेगा. केंद्र सरकार का ये फैसला निंदनीय है. इन्होंने बताया कि रक्षा कर्मचारी संघ के समर्थन में विरोध हो रहा है.

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किन किन संगठनों का रहा समर्थन

इस दौरान सीटू, एटक, इंटक, एक्टू, एचएमएम यूनियनों की मुख्य भूमिका रही. वहीं सरकारी, मानदेय और निजी सेक्टर के कर्मियों ने भी विरोध दर्ज किया. कोयला, इस्पात, बैंक, बीमा, राज्य व केंद्र सरकार के दफ्तरों, आंगनवाड़ी केंद्रों और विभिन्न कल-कारखानों के कार्य स्थलों में विरोध प्रदर्शन किया गया.

राजधानी रांची में बीफे कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया. जानकारी दी गयी कि सभी जगह कोविड दिशा निर्देशों का पालन किया गया है.

वहीं एसीटीयू के पीके गांगूली ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से अध्यादेश को लेकर विरोध जारी है. सरकार कोविड काल में भी ऐसे कानून ला रही है, जो जनहित में नहीं है.

इस दौरान सीटू से प्रकाश विप्लव, अनिवार्ण बोस, एमएल सिंह समेत अन्य मौजूद रहे.

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