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दवाई दोस्त को हटाने का आदेश, मेडाल और हेल्थ मैप को कब हटाएंगे साहब!

Ranchi : राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में व्यवस्था सुधारने को लेकर हाईकोर्ट ने प्रबंधन को फटकार लगाई थी. साथ ही कहा था कि रिम्स पूरी तरह से बाहरी व्यवस्था पर डिपेंड हो गया है. कोर्ट ने हॉस्पिटल में काम कर रही प्राइवेट एजेंसी मेडाल और हेल्थ मैप को हटाने को लेकर निर्देश जारी किया था. इतना ही नहीं दवाई दोस्त को कैंपस में दुकान खोलने को लेकर सवाल उठाया था और रिम्स प्रबंधन से जवाब मांगा था. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने तत्काल दवाई दोस्त को दुकान खाली करने का आदेश जारी कर दिया है.

लेकिन हॉस्पिटल में पीपीपी पर चल रहे मेडाल और हेल्थ मैप को हटाने को लेकर प्रबंधन की ओर से अबतक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि मेडाल और हेल्थमैप को हटाने को लेकर रिम्स प्रबंधन कब कार्रवाई करेगा.

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हेल्थमैप ने ढाई करोड़ का दिया है बिल

रिम्स में पीपीपी मोड पर काम कर रही हेल्थमैप एजेंसी रेडियोलॉजी के टेस्ट करती है. जिसके तहत सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और इको के अलावा कुछ अन्य टेस्ट भी किए जाते है. जहां रिम्स से अलाउ फ्री कराने के बाद मरीजों के टेस्ट सेंटर में फ्री किए जाते है. जिसका भुगतान रिम्स प्रबंधन एजेंसी को करता है.

फिलहाल एजेंसी ने रिम्स प्रबंधन को ढाई करोड़ रुपए का बिल दिया है. जिसपर फिलहाल प्रबंधन ने रोक लगा दी है. लेकिन इससे पहले भी करोड़ों रुपए एजेंसी को रिम्स प्रबंधन भुगतान कर चुका है.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिम्स ने जितना भुगतान एजेंसी को कर दिया अगर उतने पैसे हॉस्पिटल की व्यवस्था सुधारने में खर्च कर दिए जाते तो मशीन भी खरीद ली जाती. और आज मरीजों को जांच कराने के लिए कहीं और दौड़ भी नहीं लगानी पड़ती.

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मेडाल भी कर चुका है करोड़ों का क्लेम

हॉस्पिटल की व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने मेडाल के साथ करार किया था. जिसके तहत मेडाल को वे टेस्ट करने थे जिसकी व्यवस्था रिम्स में नहीं थी. लेकिन धीरे-धीरे मेडाल ने सभी टेस्ट करना शुरू कर दिया. इसके लिए करोड़ों रुपए का क्लेम कर भुगतान भी ले लिया. आज भी एजेंसी रिम्स में मरीजों के सभी पैथोलॉजी टेस्ट कर रही है.

जबकि इसे भी हटाने को लेकर जीबी की बैठक में सहमति दी गई थी. साथ ही कहा गया था कि रिम्स खुद को आत्म निर्भर बनाए जिससे कि मरीजों को टेस्ट कराने के लिए रिम्स से बाहर न जाना पड़े. बताते चलें कि पिछले साल मेडाल को 31 करोड़ भुगतान किए जाने के मामले की जांच भी कराने के लिए टीम गठित की गई थी.

रिम्स के सर्जन सह पीआरओ डॉ डीके सिन्हा का कहना है कि इस मामले में कोई जानकारी नहीं है. प्रबंधन से जानकारी लेने के बाद कुछ बता सकता हूं.

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