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घरेलू कामगार महिलाओं को स्मार्ट कार्ड देने का आदेश ठंडे बस्ते में

विभाग बना रहा है टेक्निकल प्रॉब्लम का बहाना

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  • मुख्यमंत्री राज्य को आइटी हब बनाना चाहते हैं और यहां योजनाएं लकटतीं हैं टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण
  • श्रम विभाग में ठप पड़ी है 2015 की श्रम शक्ति पहचान योजना
  • योजना के तहत असंगठित कर्मकारों को देना था स्मार्ट कार्ड और अन्य सुविधाएं
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CHHAYA

Ranchi:  रांची। सपना था राज्य को आइटी हब बनाने का, लेकिन आइटी हब राज्य बने कैसे, जब विभागों में ही इसकी उचित व्यवस्था न हो. साल 2015 में पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने असंगठित कर्मकारों विशेषकर घरेलू कामगार महिलाओं को स्मार्ट कार्ड देने का आदेश श्रम विभाग को दिया था. श्रम शक्ति पहचान कैंपेन के जरिये असंगठित कर्मकारों को स्मार्ट कार्ड देना था. अब योजना को तीन साल हो गये लेकिन विभाग की ओर से एक भी स्मार्ट कार्ड कर्मकारों को नहीं दिया गया. स्मार्ट कार्ड निर्गत कराने के लिए भारत सरकार की ओर से श्रम विभाग को साफ्टवेयर दिया गया था. लेकिन तकनीकि जानकारी नहीं होने कारण अब तक एक भी स्मार्ट कार्ड निर्गत नहीं हो पाया.

दो दिन श्रम विभाग में लगा कैंप

श्रम विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि योजना के लागू होने के बाद दो दिन विभाग परिसर में कैंप लगा कर निबंधन की प्रक्रिया की गयी थी, लेकिन कैंप सफल नहीं हो पाया. निबंधन की प्रक्रिया रोक दी गयी. अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट कार्ड की  जगह असंगठित कर्मकारों पहचान पत्र निर्गत किया जा रहा है.

पांच महिलाओं को सांकेतिक रूप में सीएम ने दिया था कार्ड

योजना की शुरुआत  2015 में की गयी थी. तब मुख्यमंत्री ने सांकेतिक रूप से पांच घरेलू कामगार महिलाओं को स्मार्ट कार्ड निर्गत किया था. साथ ही असंगठित कर्मकारों को स्वास्थ्य, बीमा समेत अन्य सुविधाएं देने का वायदा किया था. लेकिन इसके बाद एक भी कर्मकार को कार्ड निर्गत नहीं किया गया.

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ये सुविधाएं मिलनी थीं

असंगठित कर्मकारों का निबंधन कर स्मार्ट कार्ड निर्गत करने से उन्हें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अंत्योष्टि सहायता राषि 15,000 से 25,000, कर्मकारों के लिए मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना में 250 से 8000 रुपये तक (यह राशि कक्षा एक से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले तक के बच्चों को दी जानी थी), कौशल प्रशिक्षण,  चिकित्सा सहायता आदि दी जानी थी.

सॉफ्टवेयर प्रॉब्लम के कारण रुका काम

संयुक्त श्रमायुक्त अजित कुमार पन्ना ने जानकारी दी कि योजना लागू तो की गयी, लेकिन यह सफल नहीं हो पायी. विभाग की ओर से स्मार्ट कार्ड नहीं दिया जा रहा बल्कि इसकी जगह पर पहचान पत्र दिया जा रहा है. जिससे मजदूरों को यह मान्यता मिलती है कि वे असंगठित मजदूर हैं. उन्होंने बताया कि साफ्टवेयर प्रॉब्लम के कारण ऐसा हुआ है. बाद में फिर सरकार की ओर से आदेश आया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से इसे जोड़ दिया जाये.

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