NEWSWING
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सीटों के पेंच में फंस सकती है विपक्षी एकता, अंदरखाने की कहानी कुछ और कर रही है बयां

1,389

Ranchi: लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए विपक्षी दल अपनी एकता का दंभ तो भर रहे हैं, लेकिन अंदरखाने की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है. विपक्षी दलों की महत्वाकांक्षा और सीटों की दावेदारी अब धीरे-धीरे सामने भी आ रही है. अगर तालमेल बिगड़ा को विपक्षी एकता की दीवार धराशायी हो जायेगी. फिलहाल सीटों की दावेदारी से निपटना बड़ी चुनौती है.

गठबंधन में बड़े नेताओं की दावेदारी बड़ी वजह

गठबंधन में बड़े नेताओं की दावेदारी बड़ी वजह है. हालांकि विपक्षी दलों के द्वारा संयुक्त रुप से 2019 का आम चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है. सैद्धांतिक सहमति भी बनी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा कम सीटों की दावेदारी कर गठबंधन के साथ चलने के मूड में है. इसकी वजह है कि झामुमो को विधानसभा में अधिक से अधिक सीटों की दरकार है. कांग्रेस गठबंधन का नेतृत्व करने की तमन्ना लेकर आगे बढ़ रही है. वह अधिक सीटों पर दावेदारी ठोंकने के मूड में है.

इसे भी पढ़ेंःराज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार की बोलती बंद, जनसंवाद में आरोपी अफसर पर नहीं दे पाये सही जवाब, सीएम बोले हटाओ डीएफओ को

वामदलों को संतुष्ट करने का भी प्रयास

गठबंधन में शामिल दल वामदलों को भी संतुष्ट करने के प्रयास में जुटे हुये हैं. अब तक जो बात सामने आ रही है उसमें वामदल को कम से कम एक सीट देने का प्रयास होगा. हालांकि मासस और माले को मनाना थोड़ा मुश्किल दि‍ख रहा है. धनबाद सीट पर मासस दावेदारी कर सकता है, कोडरमा सीट को माले छोड़ने के मूड में नहीं है.

पलामू और चतरा में राजद ठोंक सकता है दावा

राजद भी पलामू और चतरा सीट में दावा ठोंक सकता है. विपक्षी दलों की ओर से बाबूलाल मरांडी को केन्द्र की राजनीति में रखने का मन बनाया जा चुका है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि बाबूलाल ने इस पर हामी भी भर दी है. गुरुवार को इस मसले पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने मुलाकात भी की. नेताओं ने दावा भी किया कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट हो कर चुनाव लड़ेगा. सभी बीजेपी को हराने के लिए साथ चलने को तैयार हैं.

इसे भी पढ़ेंःअब आतंकियों के निशाने पर पुलिसकर्मियों के परिजन ! पांच लोगों को किया अगवा

किस सीट पर किसकी-किसकी है दावेदारी

झामुमो: दुमका, राजमहल, गिरिडीह और चाईबासा

कांग्रेस: रांची, लोहरदगा, खूंटी, जमशेदपुर और धनबाद

जेवीएम: कोडरमा, गोड्डा और चतरा

सीपीआई: हजारीबाग

madhuranjan_add

इसे भी पढ़ेंःबोकारो डीसी के फैसले से सरकार को होता 3.5 करोड़ का नुकसान, जिसे मिली थी कौड़ी के भाव जमीन उसी ने बढ़ायी बोली 

किस सीट पर कहां फंस सकता है पेंच

कोडरमा: इस सीट से अगर बाबूलाल चुनाव में खड़े होते हैं तो माले का क्या रूख होगा. क्या माले अपनी उम्मीदवारी गंठबंधन के लिए छोड़ देगा. बाबूलाल अगर कोडरमा सीट से चुनाव नहीं लड़े तो पार्टी की ओर से प्रणव वर्मा को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. इस स्थिति में माले को सीट छोड़नी होगी. इसमें गठबंधन के वरीय नेताओं को भी संदेह हो रहा है.

गोड्डा: इस सीट पर फुरकान अंसारी अपनी तैयारी कर रहे हैं जबकि गठबंधन होता है तो इस सीट पर जेवीएम भी अपनी दावेदारी ठोंक सकता है. कारण यह है कि जेवीएम के प्रधान महासचिव सह विधायक प्रदीप यादव खुद ही लोकसभा में अपना भाग्य आजमायेंगे. अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस को  फुरकान अंसारी को मनाये रखने में बड़ी चुनौती होगी.

चतरा: इस सीट पर कांग्रेस-झामुमो को छोड़कर सभी विपक्षी दलों की दावेदारी की बात सामने आ रही है. राजद के अनुसार  गठबंधन में आरजेडी को चतरा सीट मिलती है तो उस पर अन्नपूर्णा देवी चुनाव लड़ सकती हैं. इसकी तैयारी भी हो रही है. जेवीएम इस सीट को लेकर ज्यादा उहापोह में है. क्योंकि एक तरफ जहां सीनियर लीडर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी का नाम इस संसदीय क्षेत्र के लिए पुख्ता माना जाता रहा है, तो वहीं झारखंड की हर खबर पर अपनी पार्टी की तरफ से बात रखने वाले केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह भी पूरी ताकत झोंक रहे हैं.

लोहरदगा: यह सीट कांग्रेस के खाते में जायेगी, लेकिन कांग्रेस के दो उम्मीदवारों के बीच दावेदारी को लेकर टकराव हो सकता है. पूर्व सांसद रामेश्वर उरांव और अरूण उरांव के बीच सीट को लेकर खींचतान हो सकती है. रामेश्वर उरांव तैयारी में जुट गये हैं.

रांची: इस सीट पर कांगेस में गतिरोध की स्थिति बन सकती है. वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार और पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय के बीच तालमेल ठीक नहीं है. संभावना जताई जा रही है कि सुबोधकांत का टिकट कट सकता है. इस सीट पर सिल्ली के पूर्व विधायक केशव महतो कमलेश या फिर कोई नया चेहरा को सामने ला सकता है.

हजारीबाग: इस सीट पर सीपीआई की दावेदारी दि‍ख रही है. इस पर विपक्षी गठबंधन भी सहमत होता दि‍ख रहा है. अगर इस सीट पर सीपीआई उम्मीदवार मैदान में आता है तो बड़कागांव के विधायक का क्या रूख होगा, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अगर पार्टी के द्वारा उनकी दावेदारी नहीं मानी गई, तो गंठबंधन को भि‍तरघात का खतरा हो सकता है.

वाम दल में गठबंधन को लेकर सबसे बड़ी चुनौती 

गठबंधन के तहत वामदलों को एक सीट से संतुष्ट करने की प्रयास चल रहा है. वहीं वाम दलों के बीच एक दूसरे दल के खिलाफ उम्मीदवार नहीं देने की सहमति‍ बनने के बाद भी दलों के द्वारा कई सीटों पर तैयारी की जा रही है.

अगर गठबंधन माले से नहीं होता है तो पार्टी की ओर से चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं. जिसमें कोडरमा, चतरा, गिरिडीह और लोहरदगा सीट प्रमुख है. वहीं सीपीआई भी चतरा, हजारीबाग, दुमका, गिरिडीह सीट पर उम्मीदवार देने की बात कहती आ रही है. मासस ने भी धनबाद और चतरा सीट पर ताल ठोक दी है. सीपीएम रांची और जमशेदपुर के लिए अपना उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Averon

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: